Saturday, January 2, 2021

गणतंत्र दिवस का असली मजा

 #ठेठ_पलामू:- बचपन के झाँकी

गणतंत्र दिवस का असली मजा तो स्कूल में ही था। स्कूल भी जाते थे, छुट्टी का भी मजा ले-लेते थे। तब भले गणतंत्र होने का महत्व समझ नहीं आता था, लोकतंत्र-लोकशाही भले अब बुझाने लगा है। फर्क यही था कि तब मेरे लिए गणतंत्र दिवस में झांकी निकलता था और स्वतंत्रता दिवस में नहीं निकलता था। स्कूल में गणतंत्र दिवस की तैयारी 15 दिन पहले से ही शुरू हो जाती थी और इस तैयारी में भाग लेने पर 15 दिन 3-4 क्लास करने से मुक्ति मिल जाती थी। भले परेड करना क्यों न पड़े लेकिन मजा उसी में था। कुछ लोग स्कूल में ही करते थे कुछ बच्चे स्कूल के तरफ से पुलिस लाइन में होने वाले परेड में हिस्सा लेने चले जाते थे। हम उसमें कभी नहीं जा पाए, ख़ैर गणतंत्र दिवस की सबसे खास बात है उस दिन निकलने वाला झांकी, स्कूल में सज रही झांकी को देखना फिर पुलिस लाइन जा कर सभी झांकियों को देखना, उसके बाद तेजी से घर लौट कर दूरदर्शन पर दिल्ली के राजपथ होने वाले कार्यक्रम को देखना।
जब सेना अपने हथियारों का शक्ति प्रदर्शन करती है तब इंसान रोमांच से भर जाता है और सभी राज्यों की झांकियों को अनेकता में एकता का महत्व पता चलता है। एक बार मुझे भी स्कूल से जाने वाले झांकी में भाग लेने का मौका मिला था। झांकी की थीम थी "कल्पना चावला की उड़ान" तब कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की पहली बेटी थी। हम सब को प्रथम पुरस्कार मिला था। झांकी के ट्रक में बैठने वाला अनुभव मेरे लिए अविस्मरणीय है।
लड्डू तो छूट ही गया। झंडोतोलन के बाद मिलने वाला लड्डू हमेशा खास होता है। इसका स्वाद किसी अन्य लड्डू में कभी-कभी नहीं मिल पाया, अब तो मिलना नामुमकिन है, क्योंकि काफी इंतजार चहलकदमी के बाद ये भारत माता के प्रसाद के रूप में मिलता है तो इसका महत्व और स्वाद बढ़ ही जाता है और सुबह-सुबह स्कूल में लता मंगेशकर की आवाज में बजने वाले गाने से देशभक्ति जज्बा बढ़ता था।
© Sunny Shukla
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