Saturday, January 2, 2021

बसना

 #ठेठ_पलामू : बसना

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ठेठ पलामू पेज की शुरुआत हमने इसीलिए की थी, ताकि पाठकगण अपनी माटी से जुड़ सकें। आज हमें #चित्र_शृंखला के अंतर्गत एक ऐसी ही तस्वीर प्राप्त हुई है, जो हमारे इस मुहिम को चरितार्थ करती है। यह तस्वीर हमें भेजा है - #मनोज_कुमार_पाण्डेय जी ने, जो #बसना गाँव के निवासी हैं। मनोज जी अभी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर रजहरा कोठी विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं।
#बसना गाँव #नावा_बाजार प्रखंड में स्थित है, जो #रजहरा_कोलियरी के निकट है। यह स्थल बहुत ही मनोरम है। विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों से भरा हुआ जंगल और उसमें विचरण करते नीलगाय, लंगूर, सियार और जंगली सूअर यहाँ आसानी से देखे जा सकते हैं। वर्षा के मौसम में इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। गाँव के दक्षिण में पुराना हनुमान मंदिर है।
कहते हैं बचपन की बात ही निराली होती है और खासकर जब हम मिट्टी में खेलते हैं। आज के शहरी परिवेश में ऐसा नजारा देखने को नहीं मिलता है और उसी के अनुकरण पर गाँवों में भी अब मिट्टी में खेलने की परंपरा लगभग समाप्त ही होती जा रही है।
आज के परिवेश में बच्चों को यूँ मिट्टी में खेलते हुए देखना आँखों को सुकून देता है। बचपन का समय बहुत ही आनंददायक होता है। उस समय सुबह की शुरुआत ही एक नए उमंग के साथ शुरु होती है।
कहा जाता है कि मिट्टी में खेलने-कूदने से बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रहते हैं। इसीलिए बच्चों को माटी से जुड़ने दीजिए। मिट्टी हमारी माँ है और हम माँ के जितने करीब रहेंगे, उतने ही मजबूत रहेंगे।
बचपन में सुबह उठते के साथ ही खेलने में लग जाने की, धूल-मिट्टी में खेलकर गंदे होने पर घर वालों की डाँट सुनने की बहुत सारी यादें आपलोगों के पास होंगी। उन यादों को हमारे साथ साझा कीजिए और यह खूबसूरत दृश्य देखकर अपने पुराने दिनों की यादों को जीवंत कीजिए।
प्रस्तुति : दिव्या रानी
Image may contain: one or more people, people standing, child, sky, outdoor and nature
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