Saturday, January 9, 2021

पहला तीज

 #ठेठ_पलामू:- पहला तीज

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बचपन से तीज के नाम सुनते ही हमनी के दिमाग में एके गो चीज आता था- 'पेड़किया'। तीज मने #पेड़किया और पेड़किया मने तीज। कहें तो एकरा में कोई दु मत नहीं है। माई के उपवास आऊ पारण से हमनी के का मतलब, पूजा खत्म पेड़किया #भकोसना शुरू या फिर ई कहे कि फिर हफ्ता-पन्द्रह दिन के लिए एही हमीन का मेन भोजन रहता था।
2-3 दिन बाद तीज आने वाला था। #एतवार के कपड़ा भी धोना था, ओकर टेंसन अलगे। एही साल बियाह हुआ है आऊ #मेहरारू तीज करे नईहर चली गई। अपने तो गइबे कि उपरे से ई कपड़ा लाता धोवे के आदत बिगाड़ के चल गई। अब छूटने के बाद काम करे के दर्द आप अनुभवी लोग बढ़िया से समझ सकते हैं। एही सब #बिछौना पर पड़ल-पड़ल सोचिए रहे थे कि ओने से माई आके उठा दी-"अरे बाबू सुनइत हे, काल्ह बाबूजी के जाए ल हऊ #समधियाना #तीज लेके। तो जा के कन्या के सब कपड़ा-लाता, सिंगार- पटार के समान ले अईहे।"
‌अब इ सुनिए बाजार से सब्जी, दुकान से राशन तक तो बियाह के बाद से शुरू कर दिए थे, पर अब ई सिंगार-पटार बड़ा मुश्किल काम था। पर अब बाबूजी के थोड़े कह सकते थे, मजबूरी में जाना पड़ा लेने। साड़ी दुकान में गए, तब तो व्हाट्सएप से फ़ोटो भेज के पसंद करवा के काम चल गया। अब बारी था, सिंगार के समान का। पहिले तो केतना बढ़िया घरे-घर #मनिहारिन सब समान प्लास्टिक में बाँध के ला देती थी, उहे से काम चल जाता था। पर अब ई ब्रांडेड श्रृंगार स्टोर वाला फ़ैशन के का कहल जाए। एगो दोस्त के लेके श्रृंगार दुकान में पहुँचे। अब पाउडर क्रीम तो इतना दिन से मेहरारु वाला यूज़ कर रहे थे, इसलिए याद था। टिकुली, सिंदूर, कंघी, ऐनक बेचारा अपने से निकाल दिया था।
अब बारी था चूड़ी के पूछा- "कि भाई भऊजी के चूड़ी के का साइज है।" अब हम ई तो जनबे न करते थे, तपाक से फोन लगाए मेहरारू के ओने से साली फोन उठाई। आवाज़ पहचाने नहीं, पूछ दिए - "आंय जी, चूड़ी कउन साइज का पहनती हो।" अब हो गया खेला आऊ का ओने से साली कहने लगी - "हाय! जीजाजी आपको दीदी के चूड़ी का साइज भी नहीं पता है।" कह-कह के चिढ़ाने लगी। तब तक ओने से मेहरारु आई तो फोन देने से पहिले उसको भी बमका दी कि देखो दीदी, #जीजाजी को तुम्हारा चूड़ी का साइज़ भी नहीं पता है। फिर का था, हो गया #महाभारत स्टार्ट आऊ का। हम आपके लिए पूरा 1 दिन का #निर्जला_उपवास करने जा रहे हैं और आप यही मानते हैं कि मेरा चूड़ी का साइज़ भी नहीं पता है न। यही प्यार करते हैं, पता चल गया हमको आज। न हम बताएँगे, न कोई और बताएगा। अब आपको अपने मन से लाना है आऊ अगर नहीं बना न तब बताते हैं, कह के फोन काट दी। अब उसको के समझाए कि कपड़ा साफ करते समय केतना मिस कर रहे थे। केतना मिन्नत करके बहिन से जा के पूछे, तब जा के पता किए आऊ ले के आए हैं।
‌पेड़किया घरे बन गया है। कल अब #बाउजी लेके जाएँगे। पर तीज के दिन हमको भी जाना पड़ेगा। साथे पूजा करने का नियम है। एक तो मेहरारू अपने बमक के फायर, ऊपरे से साली कह रही थी कि अब पूजा करके कुछ खाइएगा। दीदी आपके लिए निर्जला उपवास करेगी, तो कम-से-कम आप फलाहार तो करिए न सकते हैं। अब के बतावे कि भूख नहीं सहाता था, इसलिए घरे से गोसा के बिना खइले निकल जाते और बाहरे भर पेट #सिंघाड़ा खाने वाला आदमी आजतक उपवास नहीं किया है। आऊ अब बियाह बाद इहो करना पड़ेगा। चलिए अबकी तीज केले के नाम रहे।
आऊ तो आऊ अब सीरियल देख-देख के नया फैशन अलगे से , साली कह रही थी कि- "पारण के दिन आपको अपना हाथ से दीदी के उपवास तुड़वाना पड़ेगा।" अब हम ठहरे एक नं. के #लजकोटर, हमसे तो ई काम कहियो नहीं होगा, चाहे अब जे हो जाए। खैर ई तो जाने के बाद ही पता चलेगा। फ़िलहाल जा रहे हैं सैलून दाढ़ी बनवा के फर- फेसियल मर-मसाज करवा लेते हैं। पहिला-पहिला तीज में आपलोग भी यही किए होंगे न और बहुत लोग का पहिला तीज अबकी होइबो करेगा, तो आपको भी डर लग रहा है का बताइएगा जरूर।
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