Saturday, January 9, 2021

हमीन घर के बुजुर्ग

 #ठेठ_पलामू:- हमीन घर के बुजुर्ग

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चाहे #गढ़वा का बस स्टैंड हो, #डाल्टनगंज की कोर्ट-कचहरी #पाटनमोड़ का बाजार हो या रांची का रेल्वे स्टेशन। सिर्फ, #डाल्टनगंज, पलामू, झारखंड, बिहार में ही नहीं बल्कि देश के चप्पे चप्पे में, आज भी धोती-कुर्ता और बंडी पहने हुए अधेड़ उम्र के या #बुजुर्ग लोग बहुतायत दिखलाई पड़ते हैं।
इन्हें देखकर हमारा मन श्रद्धा से भर जाता है और अपने घर के बाबा, नाना, चाचा, फुफा, मौसा आदि लोगों की स्मृतियाँ जीवंत हो उठती है। सामान्यतः हमारी जड़ें गांव से जुड़ी हुयी है,और आज भी यह #पारंपरिक वेशभूषा हमारी गौरवशाली संस्कृति का स्मरण कराती है। वर्तमान समय में देश के बाकी हिस्सों के बजाय अपने पलामू जिले के गांव और शहरों में ऐसी वेशभूषा धारण किए हुए लोगों की संख्या सबसे ज्यादा दिखलाई पड़ती है।
हमारे पलामू संभाग में अधिकांश बुजुर्ग आज भी इस परिधान को पहनना पसंद करते हैं। सफेद कलफदार धोती, कुर्ता, #बंडी और #गमछा लिए हुए इनकी ठसक ही अलग होती है।कुछ लोग #खादी का एक झोली भी लिए रहते हैं। जिसमें चश्मा कवर,कुछ अखबार या किताबें, जरूरी कागजात आदि चीजें मौजूद रहती है।साथ में एक खाली थैला रखना नहीं भूलते कि शाम को वापस घर लौटते समय सब्जी और आवश्यक किराना सामग्री रखना नहीं भूलते हैं।
हमारे गाँव में ढ़ेर सारे ऐसे बुजुर्ग हैं। जो नौकरी से रिटायर हो चुके हैं।वे सुबह-सुबह आधा घंटा अखबार में सभी खबरों को पढ़ने के बाद अपने मित्रों से गप्पबाजी करने के बाद,अपनी #डायरी निकालते हैं और दिन भर क्या करना है,उसकी प्लानिंग बनाते हैं। ऐसा कोई दिन नहीं होता कि वह घर में आराम से बैठें। सुबह नौ- दस बजे के बाद ही शहर की तरफ या किसी पुराने मित्र या रिश्तेदार के घर की तरफ निकल जाते हैंऔर शाम को सभी काम निपटाकर सुकून के साथ घर लौटते हैं।
नौकरी से रिटायरमेंट के बाद भी वे बेहद व्यस्त रहते हैं।कोर्ट-कचहरी,बाजार,अस्पताल,अपने परिचित परिवारों के लड़के-लड़कियों के लिए रिश्ते खोजने के साथ-साथ अपने सभी रिश्तेदारों के मांगलिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होना इनकी प्रमुख जिम्मेदारी होती है। कुछ लोग समाज सेवा/ राजनीति में तो कुछ धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ये हमारे अमूल्य धरोहर है।जिनके बेशकीमती अनुभव ,सक्रियता और उदार स्वभाव के कारण ये सिर्फ हमारे घर गाँव-घर के ही नहीं बल्कि हमारे क्षेत्र की शोभा बढ़ाते हैं। ठेठ पलामू के माध्यम से ऐसे सम्माननीय #अभिभावकजन को सादर स्मरण करते हैं, प्रणाम करते है और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ऐसे माननीय लोगों का आशीर्वाद हम सभी को सदैव मिलता रहें।
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