#ठेठ_पलामू : शिव चबूतरा और घड़ा
बीसो के बाद एक तरह से कुछ धार्मिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं. धार्मिक हो न हो भयंकर वाली गर्मी तो जरूर स्टार्ट हो जाती है. अब गर्मी के बारे में पोस्ट बाद में. आज बात शिव चबूतरा के ऊपर रखे घड़े की.
लगभग-लगभग सभी घर मे नहा धोआ के शंकर जी के चबुतरा में एगो घड़ा रखा ही गया होगा जिसमे नीचे छेद कर के सूती कपड़ा का बाती लटकाया गया होगा ताकि टोपे टोप पानी गिरते रहे शंकर जी के कपार पर. पहिले तो बाँस के स्टैंड बनल रहता था ओकरे पर घड़ा रखाता था पर बाँस वाला साल दू साल में टूट जाता था इसीलिए अब लोहा के बन गया है.
शिव जी बेचारे भोले नाथ हैं. ई भारी दुपहरिया मे घाम लहर सहते हुए हमारी रक्षा करते हैं तो हमारा भी तो कोई फर्ज बनता है. दूसरी बात कि अब शंकर जी के सर के ऊपर गंगा माई बिराजमान रहेंगी तो कमसे कम ईहे बहाने उनको गुस्सा भी नहीं आएगा और महाकाल की कृपा बनी रहेगी.
ये तो हुआ धार्मिक आस्था वाला कारण. लेकिन इसी बहाने गर्मी मे बेचैन गौरैया और अन्य पक्षियों की प्यास का भी इंतजाम हो जाता है. कहते हैं न धार्मिक रिवाज या परंपरा किसी न किसी वैज्ञानिक सिद्धांत पर ही बने होते हैं, अलग बात है कि समझने वाले कभी अंधविश्वासी हो जाते हैं तो कभी अपनी सुविधा के लिए मलिक से फ़ेर बदल कर के उसके वास्तविक उद्देश्य से भटक जाते हैं.
खैर ये बताइए कि आपलोग के घर घड़ा टँगाया कि नहीं? फ़ोटो डालिये और प्रेम से बोलिये -जय #महाकाल
© Sunny shukla

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