#ठेठ_पलामू- दाल भात चोखा
आज ही #फेसबुक पे एगो वीडियो देख रहे थे, उसमें दे रहा था कि #दाल-#भात विश्व का सबसे पौष्टिक आहार है। अब उ पौष्टिक केतना है ई तो नहीं पता लेकिन इतना तो जानते हैं कि 56 भोग एक तरफ आउ दाल भात का मज़ा एक तरफ है। अगर आपने विद्यार्थी जीवन जिया है, मने #डेरा में रहे हैं तो आपसे ज्यादा इसका महत्व कोई नहीं समझ सकता है।
अगर आप डेरा में रहे हों, तो फिर #DBC से बेहतर शायद ही कोई खाना लगा हो आपको। DBC मने नहीं समझे का,अरे! वही दाल भात #चोखा (Dal Bhaat Chokha )। अब नाम सुनते मुँह में पानी आ जाए, तो उसका जिम्मा हमको मत दीजिएगा, का करिएगा चीज ही ऐसा है।
गरमा-गरम दाल भात और #आलू_का_चोखा मिल जाए और उसपे एक चम्मच घीव डाल दीजिए और इत्मीनान से चाँप के खाइए। उ मजा आएगा, जो छप्पन भोग खाकर भी नहीं मिलता। केतना लइकन तो डेरा में #सेपरेटर रखता था कि बस एके साथे दाल भात आऊ चोखा के लिए आलू #सीझ जाता था।
वैसे तो #धनबाद में गरम दाल भात आऊ चोखा खाने का नसीब तो रोज-रोज मिलता नहीं था। पर #एतवार के दिन भोरे उठते सब के कपड़ा धोना रहता था। अब बाथरूम एके ठो, तो बारी-बारी से धोते-धोते 12-1बज जाता था। अब एतना देर होने से केकरो में हिम्मत नहीं बचता था कि सब्जी काटे-बनाए, इसलिए चुपचाप दु ठो कुकुर में चावल-दाल चढ़ा देते आऊ दाल में डाल देते थे आलू। जब तक ओने कुकर सिटी लगाता, तब तक इधर लहसुन प्याज़ आऊ हरियर मिचाई काट के रेडी रखते।
जैसे ही दाल बन जाता उसको घीव से छनका देते। आऊ आलू निकाल के उसको प्याज़ #लहसुन #मिचाई के साथ तेल में भूंज देते। उसके बाद चारों लईकन जे खाने बइठते। समझिए हफ़्ता भर के मेक अप उहे दिन हो जाता था। खाना एतना खिया जाता कि पानी भी 2-4 घण्टा बाद ही जरूरत पड़ता था। खाने के बाद जे कुम्भकर्ण जैसा सोते कि सीधा शाम में ही उठते थे। कभी-कभी तो सादा चोखा भी सरसों तेल देके बनाते थे । उ भी बहुत मस्त लगता था। एगो आउ चोखा का #वेरायटी है न का कहते हैं जवन में पहिले चोखा मइस के आउ लाल मिचाई आऊ जीरा के तेल में कलछुल में लेके जरा के चोखा में मिला दिया जाता है। हमर बाबा कभी-कभी ऐसे ही बनवा के खाते हैं।
अब देखिए न बताते-बताते हमरो मन करने लगा खाने का, पर अभी ऑप्शन नहीं है कुछु । पर अबकी बार जहिया घरे गए न तो पक्का खाएँगे।

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