#ठेठ_पलामू:- अकीला_फुआ
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पलामू में किसी लड़की या महिला को बुद्धिमान या असाधारण योग्यताओं के लिए सम्मानित करने के क्रम में उसे अकीला फुआ की उपाधि दे दी जाती है। #अकीला_फुआ यानी जिसके पास हर तरह का ज्ञान हो और हर समस्या का उपाय। आकस्मिक परिस्थितियों में अपने आस-पास की सामग्री का इष्टतम उपयोग करने की शक्ति।
ज्ञान का यह अर्थ कदापि नहीं कि अकीला फुआ अंतरिक्ष वैज्ञानिक हो या उसे ब्रेन सर्जरी आती हो, बल्कि हम जिन योग्यताओं और ज्ञान की चर्चा आगे करने वाले हैं, उनको पढ़ कर आप भी कहेंगे कि अकीला फुआ होना बहुत कठिन ही नहीं, लगभग असंभव है।
यूँ ही नही किसी को अकीला फुआ कह दिया जाता है। अपनी पीढ़ी में एक या दो को ही अकीला फुआ का दर्जा मिल पाता है। अपने आस-पास बिखरे जानकारी और अर्जित ज्ञान का अगली पीढ़ी में अंतरण और संरक्षण का काम अकीला फुआओं ने ही किया है।
पारम्परिक दंतकथा की माने तो किसी अकीला फुआ ने अपनी योग्यता का प्रथम प्रदर्शन एक विवाह समारोह में किया था। पहले का समय था, कम उम्र में ही ब्याह हुआ करते थे। शहर से घनघोर देहात बारात आई थी और चढ़ावे में दुल्हन के लिए एक जोड़ी चप्पल भी थी। सुंदर तरह-तरह के सुनहले चमकीले धागों से सजी चप्पल। इधर चप्पल डब्बे से निकली उधर घरवालों में हलचल हो गई। यह क्या गहना है? इसको किस अंग में पहनना है। दरअसल अभी तक गाँव वालों ने चमरौधा जूता से आगे देखा ही नहीं था। उस पर यह चप्पल छोटी-सी बालिका बधू के लिए था। बहुत देर तक विमर्श के बाद लड़की की फुआ ने बताया कि इसमें फीते हैं, जिनमें कान आ जा रहा है। अतः यह एक तरह का कान का गहना है।
दंत कथा में अकीला फुआ की कहानी अपनी जगह पर गाँव-देहात में अकीला फुआ कहलाने के लिए आवश्यक योग्यता देखिए। जबान खुली-की-खुली न रह जाए तो कहिएगा।
1. #तीन_अछिया या ज्यादा का मिट्टी का चूल्हा पारना और बैठाना आता हो।चूल्हे में लकड़ी और #चिपरी सुलगाने और राख निकालते समय #करिखा कम-से-कम लगे।
3. फुंसी पर तीसी लगाकर घाव पकाने और बेल या करवन के काँटा से घाव फोड़ना आता हो। बिना घिंघिनाए खील भी निकाल दे और साफ कपड़े की पट्टी बाँध दे। बस, बीच-बीच में लाही का रस चुवाने की ड्यूटी खुद करनी होगी।
4. नाक-मुँह पर कपड़ा बाँध के लुकाठी से हाड़ा/बिरनी के खोता झुलस दे। बिच्छू को चप्पल से मार दे। #होरहोरवा और धामिन साँप को लाठी से भगा दे। फणिका और करैत के मुँह पर दूर से टॉर्च तब तक जलाए रखे, जब तक साँप को मारने कोई नहीं आ जाता। छिपकिली और कॉकरोच देखकर उछल जाने वाली देवियों मुझे क्षमा करें।
5. कुँआ में गिरी बाल्टी को #झगड़ से निकाल ले। आहर-पोखर में बेहिचक डभ-डभीया मारने की हिम्मत रखती हो।
6. छोटी बहन और भाई के पक्ष में बाहर जाके लड़ाई कर ले। गाँव की तेरह पुश्तों का नाम याद रखे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर गाली देने और विवाह में गीत गाने में आसानी हो।सहेलियों के कन्या पुत्री रखने की जगह और कांड याद रखे, ताकि 20 साल बाद भी वो इज़्जत से पेश आवें।
7. उम्दा गीतिहारीन हो, बाराती को गाली देने में बिना लजाए आगे हो।सहबाला को फुसला कर दूल्हे की माँ, बहन और फुआ का नाम पूछ लें। विवाह के गीत के कॉपी बनाए और अगली पीढ़ी को दे।शादी बियाह में सबको साड़ी पहनाए और प्लेट ठीक करे।
8. अदौरी, तिलौरी, अरिसा, पुआ, ढुुस्का, दुधौरा, बरी, फुलौरी, केरा और धरौरी सब बढ़िया बनाने आता हो।पहँटा को बिना जलाए भुंज दे। आम, कटहल, ओल, आँवला, नींबू ,मूली और बाँस के अचार के साथ-साथ खटाई/बेरगुंडी बनाने और बराबर का अचार बनाने जानती हो। फरहर भात के साथ साथ गुलहथि और घाठा एवम महेर भी बना लेती हो।
9. लेवा/लेदरा सीने आता हो। काशी से झाड़ू बीन लेती हो। नवजात बच्चों के लिए सूती साड़ी फाड़ कर फलिया बनाने आता हो। टेबल क्लॉथ, तकिया के खोल पर सुई धागे से वेलकम लिखना जानती हो। चुड़िहारिन और डफेलिन से श्रृंगार पटार के सामान सस्ता दाम पर खरीद ले। फॉल पिको कढ़ाई बुनाई में आगे रहे, कोई भी डिजाईन हो झट से कॉपी कर ले।
स्वेटर को बिना उघाड़े, डिज़ाइन समझ ले।
10. चलनी, सूप, जाँता और ढेंकी चलाना और उसके गीत जानती हो, कड़ाही में दूध औटाने और दही मह कर घी निकालने आता हो। जरूरत पड़ने पर गाय दूध ले। ढांकर और फेनुस बनाना जानती हो। रूह अफजा और गुलाबजल न रहने पर पुदीना डालकर झटपट शरबत बनाने आता हो।
11. छोटे बच्चों का नजर उतारने के लिए औंछ-पौंछ करना और हंसुली बैठाने जानती हो।
12. बिना नागा बीफे का व्रत करती हो और शिवरात्रि का व्रत भी।
13.बड़ी बहन और भाई के हर काम में कमी खोजना आवश्यक शर्त है। पापा की दुलारी और मम्मी का सहारा हो।भाइयों से बने या न बने पर भाभी की आँख का तारा रहे। भतीजे-भतीजी रुलाई में भी उसी को खोजे। इतने काम और व्यस्तता के बाद भी बिना कॉलेज गए, शर्मा गेस पढ़कर 1st डिवीजन पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स कर ले।
सभी अकीला फुआ के सम्मान में समर्पित।
@Rajeev Ranjan Tiwari

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