Saturday, January 2, 2021

कोरोना के रोना

 #ठेठ_पलामू:- कोरोना के रोना

मस्त होली के छुट्टी में घरे आएल हली। एक हफ्ता के छुट्टी के खुशी हलक। तब तक थोडा-थोड़ा कोरोना के हवा-खबर सुनले हली कि #चाइना में बा। जैसे सब हल्का मेें लेवत हलन हमहूं हल्का में लेली और नजरअंदाज कर देली। लेकिन कोरोना के हल्का में लेवल बहुत भारी पड़ गेल अब न्यूज में सुनत ही कि कोरोना फैलल जाईत बा और भारत में भी #सटल आवत बा। तबो अभी उतना डर ना हलक भारत में। अब होली खत्म भेला के बाद फिर बेमन से घरे जाए के तैयारी में लाग गेली। तब तक सुनत ही कि कोरोना भारत मे भी आ गेल और जनता कर्फ्यू भी लग गेल।
अब गाँव के आदमी पूरा टेंशन में कि का होई। एगो पूछत हथ कि का होवेला बाबू कर्फ्यू में का तो सुनत ही की बोलेला नखई दिन भर कि खाय-पीए ला नखई कि एकदम खतमे लाग जाय ला हई। फिर हम बतईली कि ना चाचा खाली घर से बाहर ना निकले के हई।
तब तक टीवी में देखली कि अल्कोहल से कोरोना खतम होला। इ सुन के एगो बगल के चाचा जे 24 घंटा मूड में ही रहा हथ से बोललन कि बाबू हमार तो अंदर बाहर सउसे एल्कोहले बा हमरा कोरोना से डर ना लगे।
ओकर बाद एक और खबर सुनली कि गांजा पीए से कोरोना खतम होव ला। इ पर एगो बाबा कहत हथ कि हमरा कुछ नई होतउ बाबू काहे कि उनकर नाश्ता, लंच, डिनर सब गांजा हलक। ईहे पर एगो चंठ लईका कहत बा...बाबा तोरा कोरोना हो गेल तो मेहरबानी हो जाई। भगवान के घरे जाए में आसानी हो जाई।
एगो ईयार कहे लगल कि जानईत हे हो अबकि अप्रिल के लगन में हमर दिल टुटेला हलऊ। हमहुँ आश्चर्य से काहे भाई अप्रैले में काहे, तो बतावे लगलक कि हमर वाली के बियाह न ठीक हो गेलाऊ, उहे चक्कर मे पैसा कुछ जामा कर के रखले हलियई कि बियाह के दिन दोस्त सब साथे कुछ दर्द बांटे के उपाय करब। लेक़िन का करबे ई #कोरोना के चक्कर मे अब कब बियाह होताऊ ईहो नखाऊ पाता। आऊ बाजार से अलिअऊ बस माई तुरंत कपड़ा #फिंच देलऊ कि बाहरी से कोरोना लेके आईल हे। अब ओकरे में रखल पैसा भी ले लेलई से अलगे टेंसन। हमहुँ हिम्मत बढाईली कैसहूँ कहली कि - का करबे भाई ई #आसमानी #सुल्तानी आफ- काफ का जन कहाँ से आईये गेल हाऊ इहे बहाने अब खुशी मनाओ कि एक दु महीना दिल टुटे में टाईम मिल गेलऊ न। तब जा के कुछ शांत होईल बेचारा।
घरे बाबा TV में देख लेलन कि मोबाईल के भी सैनिटाइज करे ला बा से रोज साँझ के कहियनकि तनी एकरो धो के लान दे। इहे तरह सब आदमी कोरोना के डर से कभी गुरीच के लर तो कभी हल्दी-दूध जैसन कई तरह के उपाय फैलावे लगलन। अईसन कोई रोग बीमारी होवा ला तो WHO बाद में पलामू के लोग पहिले रिसर्च स्टार्ट कर देव हथ और फिर अईलक लॉकडाउन मने घर से बाहर नहीं निकलेला काहे कि कोरोना के डर और बीमारी ज्यादा फैले लागल रहे। डर तो अईसन बा कि अब हर घर के माहौल धार्मिक हो गेल बा। जहाँ खेसारी और बटुरा के गाना बजा हलक, वहाँ अब हनुमान चालीसा बजे लगल बा। हमर तो डर से ई हालत बा कि सपनों देखे लगली कि आसपास सब मर गेली। जे जे पूजा पाठ कर हलन घरे अब #सरग जाईत हथ बस हमहीं अकेले नरक जाईत ही फिर का उठ के तुरंत भजन कीर्तन चालू आऊ का। घर से बाहर नईखे जाए ला, बैठ के कीर्तन करेला बा।
भगवान के कृपा बने ना बने लेकिन कोरोना के डर अभी तक बनल बा। अभी तक के यही माहौल बा। घर से बाहर मत जाइए, घर पे बैठिए तनी दूरी बनाइए।
धन्यवाद।
@Balendu Shekhar

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