Saturday, January 2, 2021

सैलून पर चर्चा

 #ठेठ_पलामू:- सैलून पर चर्चा

#रविवार का दिन, मतलब बाल और #हजामत बनवाने का दिन। संसद के बाद दो ही ऐसी जगह होती है, जहाँ देश के हित में विभिन्न मुद्दों पर खुल कर चर्चा होती है, जिसमें पहले स्थान पर चाय की दुकान और दूसरे स्थान पर सैलून आता है। चूँकि चाय पर चर्चा हमारे देश के महान #बुद्धिजीवी कर रहे हैं, तो हम आज सैलून पर चर्चा करेंगे। प्रायः हम रविवार के दिन ही बाल और हजामत बनवाने के लिए जाते हैं। इस दिन सैलून पूरा भरा हुआ रहता है और सैलून के स्वामी का व्यक्तित्व भी बदला-सा नजर आता है।
हमारे #नऊआ/ठाकुर साहब इस सभा के अध्यक्ष होते हैं। इनकी नजर गाँव-घर से लेके देश-विदेश के ख़बरों पर रहती है। जैसे ही हम सैलून पर जाते हैं, पहला सवाल सीधे #अध्यक्ष से केतना के बाद हमार नंबर आई? अरे! बैठिए न अभी तो अईबे किए हैं। फिर नज़रें रहती हैं, खाली कुर्सी या बेंच पर जहाँ बैठा जा सके। #टाइमपास के लिए वहाँ दो-तीन अखबार और पत्रिकाएँ रखी होती हैं। तभी एकाएक मोदी सरकार का करेगा, यही तो लोहरदगा में कर्फ्यू लग गया। का जाने कौन-सा बिल पास किया, हिला के रख दिया। शांति से जो चल रहा था चलने देता। तभी एक आदमी जो कि भाव-भंगिमा से बीजेपी सपोर्टर लग रहा था और लाल वर्ण का #रासायनिक_पदार्थ चबा रहा था, वो 'यहाँ #थूकना मना है' के बोर्ड पर निशाना लगते हुए बोलता है - "यही तो बात है बाबू जो कोई नहीं कर सकता बीजेपी के सरकार करेगा यह सुशासन की सरकार है।"
तब तक अध्यक्ष महोदय फुल सपोर्ट में, "मोदी ही थे जिन्होंने स्वच्क्ष भारत मिशन चलवाया, घर-घर शौचालय बनवाए।" तभी विरोधी- "एक गरीब को खाना नहीं मिल रहा है और चले हैं शौचालय बनवाने। #खाएगा_नहीं_तो_वहाँ_जाके_करेगा_का_कीर्तन।" तभी अध्यक्ष साहब थोड़े ऊँचे स्वर में एक-आध अपशब्दों के साथ, "महीने महीना राशन मिलिए रहा है, तो का मोदी जी अब मुँह में खिआ देंगे।"
अब मेरा नंबर आता है, हजामत बनवाने का। हर बार की तरह पूछते हैं कैसा बाल काटना है और हर बार वही पुराना स्टाइल में बाल काट देते हैं, चाहे हम कितना भी समझाए। इसीलिए आज हम बोले आपको तो पता ही है कि कैसे काटना है और इसी बीच यदि कोई विरोधी बात बोले तो वे उसको जवाब देते हुए सर को ऐसे मोड़ते हैं जैसे कार का #गेयर हो और इसी तरह हम अपने #हेयर_स्टाइल से असंतुष्ट होकर सैलून से निकल जाते हैं।
नोट:- लेखक महोदय का यह पहला आलेख है। पलामू के सैलून के माहौल को व्यंग्यात्मक रूप देने की एक कोशिश की गई है।
@Balendu Shekhar Pandey
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