#ठेठ_पलामू:- पिकनिक
गिरगिट के दौड़ रोड से घोरानी तक,
हमनी के दौड़ केचकी के दुमुहानि तक।
पिकनिक का सीजन चालू हो चुका है, माफी चाहेंगे फैशन में है वनभोज लिखना।
केचकी में दो पिकनिक स्पॉट हैं और दोनों ही बेहद खूबसूरत हैं, एक स्टेशन साइड वाला, जो पथरीला है और पहाड़ों से घिरा है, पत्थरों से भरा, जहाँ पानी के चट्टानों से टकराने की आवाज मन मोह लेती है, जो लोग ट्रेन से जाते हैं मुख्यतः यहीं जाते हैंहैं। बचपन में 3-4 बार जाने का सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ है। एक बार दो मुर्गा ले कर जा रहे थे #मुर्गा ही भाग गया था, फिर स्टेशन पर अंडा मिला तो उसी से काम चलाना पड़ा। वैसे यहीं असली #वनभोज वाला आंनद आता है, जंगल से लकड़ी चुन कर पकाने वाला मजा यहीं मिलेगा।
और दूसरा स्थल है #ओरंगा और #कोयल का संगम, जो बेहद ही खूबसूरत है। साथ ही बालू पर बैठ कर बनाना-खाना वनभोज के आनन्द को दोगुना कर देता है। अब लोगों के पास कार से जाने की सुविधा बढ़ गई है, इसलिए ज्यादा लोग यहीं जाते हैं। यहाँ 25 दिसम्बर और 1 जनवरी को जबरदस्त भीड़ होती है, एक दम छठ के घाट जैसा, dj से ले कर टेंट लगवा कर लोग पिकनिक मानते नजर आ जाते हैं। वैसे ये वाला मुझे कुछ खास पसंद नहीं, जब तक संघर्ष न हो खाना बनाने में पिकनिक का मजा नहीं है। आग तक जलाने में कभी हवा, तो कभी बालू जब तक विघ्न न डाले लगता ही नहीं कि वनभोज पर आए हैं।
कभी पिकनिक का सीजन ख़त्म होने पर जाइए, हर जगह प्लास्टिक के प्लेट, गिलास और बीयर का बोतल फेंका हुआ मिलेगा, जो बहुत ही ख़राब लगता है। अब गैस चूल्हा पर खाना बना के, प्लास्टिक का प्लेट में खा के और डिब्बा बंद पानी पीना ही है, तो उ तो घरे भी हो सकता है, उतना दूर जाने का क्या जरूरत है। अरे महाराज जंगल में जाइए, सुखल लकड़ी चुनिए, चूल्हा बनाइए और उसपे खाना बनाइए। फिर थर्मोकोल के प्लेट के बदले पत्तल में खाइए, तब न मजा है। बहुत लोग तो लिट्टी-चोखा का पार्टी भी करने वहाँ जाते हैं। अब गोइठा पर का लिट्टी खाना हो, तो उससे बेस्ट जगह क्या हो सकता है, आस-पास के गाँव में ही आपको सब मिल जाएगा।
@Sunny Shukla

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