#ठेठ_पलामू :चैनपुर किला और रथयात्रा
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कहानी इहे है कि राजा तो राजा होते है जी! खाली धन के राजा थोड़े ही, मन के भी. कहावत है न - "हाथी केतनो दुबराई त लूती नई हो जाई."
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कहानी इहे है कि राजा तो राजा होते है जी! खाली धन के राजा थोड़े ही, मन के भी. कहावत है न - "हाथी केतनो दुबराई त लूती नई हो जाई."
डाल्टनगंज कोयल नदी से दक्षिण तरफ करीब 2-3 मील के दूर पर चैनपुर राजा का किला है. किला में शिव जी का शिवालय और भगवती जी का मंदिर है. गढ़ से सटा हुआ है एक तालाब. इसके चारो तरफ से घेरा बंदी किया गया है और सीढ़ी भी बना हुआ है. इसी में राजा - रानी स्नान किया करते थे. राज चैनपुर गढ़ के दूसरे तल्ले पर कचहरी बना हुआ है वहीं पर सभी का लेखा-जोखा शासन कार्य होता था. गढ़ में एक तरफ आज भी देखने को मिलेगा राजशाही के समय का बनाया हुआ 'घोड़सार' (घोड़ा बांधने की जगह), हाथी बाँधने की जगह और गढ़ में स्थित जगन्नाथ स्वामी- सुभद्रा-बलराम जी की भव्य मूर्ती. आउ तीन गो रथ जो हर समय लगल रहता है.
रथयात्रा निकालने के लिये आद्रा नक्षत्र में भव्य मेला का आयोजन किया जाता है - कीर्तन भजन के साथ निकलती है दर्शनीय रथयात्रा. उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी मंदिर की तरह ही देश के विभिन्न क्षेत्रों में भी रथ यात्रा का आयोजन होता है. रांची का जगन्नाथ मंदिर भी ओडिशा के मंदिर की ही तरह वहां के राजा ने बनवाया था. कहते हैं कि इससे राज्य की प्रजा खुशहाल रहती है. शायद इसीलिए चैनपुर राजा ने भी यहां इस परंपरा की शुरुआत की थी.
रथयात्रा #चैनपुर_गढ़ से निकलकर सरकारी अस्पताल (जे चैनपुर राजा के पूर्वज भगवत दयाल सिंह बनवाये थे, जे आज सरकार के देख-रेख में चल रहा है) से होते हुए कृष्णदह पहुंचता है. कहा जाता है कि भगवान कृष्ण इहाँ गोप गोपियों के साथ जल क्रीड़ा किया करते थे. ओकरे आज सब #किशुनदाहा कहते हैं.
कृष्ण, बलराम और सुभद्रा जी द्वितीया से लेकर आठ-दस दिन वहीं रहते हैं. छप्पन भोग, मिठाई, बरी-कढ़ी इत्यादी का भोग लगता है. एक बात और भगवान को जो भोग लगता है उसमें अद्भुत स्वाद आ जाता है.
चैनपुर प्रखंड के पनेरीबांध गाँव के रहने वाले स्वर्गीय महादेव पाठक राज पुरोहित थे. उनकी विद्वता के साथ साथ उनकी कविता के कारण भी राज दरबार में उनकी खूब प्रतिष्ठा थी. उन्होंने कविता के रूप में ही कई घटनाओं का उल्लेख किया है. इनका अध्ययन उस समय के पलामू को समझने के लिए किया जा सकता है. एक अलग पोस्ट में उनकी कविताओं और उनसे जुड़े रोचक किस्सों का उल्लेख किया जाएगा. आज चर्चा चैनपुर किला और रथयात्रा पर.
बाबा महादेव पाठक कहते थे कि सुभद्रा जी का ससुराल चैनपुर गढ़ में और नईहर 'किशुनदाहा' (कृष्ण दह) में मान लिया गया है. रिवाज के अनुसार साल भर में एक बार कृष्ण-बलराम अपनी बहन सुभद्रा को नईहर ले जाने के लिये आते हैं. पाहुर-पुड़िया के रूप में 'अनरसा' (अरीसा) चढ़ाया जाता है जो कि हमलोग के इहाँ बेटी-बहीन के आने जाने के समय 'सनेस' (संदेश) के रूप में भेजा जाता है.
आज भी डाल्टनगंज में राजा साहब का बंगला कोयल नदी के किनारे है और इनके तीन पुत्र टिकइत, पटइत और छोटइत साहेब के नाम से जाने जाते हैं.
आप सब भी आइए साहब घूमने चैनपुर किला, और कृष्ण दह में डुबकी लगाइए. नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करिए और चैनपुर किला के तस्वीरों को निहारते हुए अपने गौरवशाली पलामू पर अभिमान करिए!
© सुधीर कुमार पाठक
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