Monday, May 21, 2018

झगड़ मगड़ के डेढ़ सौ

#ठेठ_पलामू : झगड़ मगड़ के डेढ़ सौ
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आज भोरे से एगो मैसेज ढेर जगह से आ रहा था व्हाट्सएप पर कि कैसे हमनी के गुरुजी गणित के फॉर्मूला सिखाते थे कविता बना बना के! उ वाला मैसेज का कुछ हिस्सा नीचे लिखते हैं ध्यान दीजिएगा...
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एक पलमुआ भाई बंगलोर सॉफ्टवेर कंपनी में इंटरव्यू देवे गया था.
"एक बात बताओ यार! तुम पलामू के लोग मैथ्स में इतना इंटेलिजेंट क्यों होते हो?"
"अरे सर! ई त हमिन के गुरुजी के कृपा से होता है। एतना जुगाड़ से हमलोग को सिखाते हैं न कि सात जनम तक नहीं भुलाएगा!"
" कैसे?"
"जइसे कि #ज्यामिति_के_सूत्र अइसे रटवाते हैं -
प्यार में धोखा है आउ है जुदाई
#त्रिभुज का क्षेत्रफल 1/2 × आधार × ऊँचाई!
अब तक किसी लड़की से हुआ न हमारा मैच
#बेलन का आयतन - पाई आर स्क्वायर एच.
प्यार करना है एक सजा
#वर्ग का विकर्ण = रूट टू × भुजा... "
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बात तो सही लगा। हमनी याद भी ओइसे ही करते थे। अब सरकारी स्कूल में पढ़ते थे तो एतना आजकल जैसा अलग अलग तरह का विषय भी नही होता था। पहले बेरा में हिंदी दूसरा बेरा में गणित। ज्यादा मेहरबान हो गए गुरुजी तो कभी कभार abcd। उ भी बड़का ABCD, छोटका वाला तो तीसरा चौथा में जा के सीखे थे और लेपटउआं वाला तो सीखिए नहीं पाए कभी। झूठे कलम लभेर देते थे शौक से कर्सीभ लिखने के लिए, नतीजा कि आपनो लिखल नहीं पढ़ पाते हैं! आजतक विलायती भाषा में कमजोर ही हैं। टो टो के काम चलाते थे अफ्रीका में। खैर इहाँ म्यांमार में तो हिन्दी से ही खाने पीने भर जुगाड़ हो जाता है।
पर हाँ सरकारी स्कूल के विद्यार्थी का हिंदी और गणित में कोई टक्कर नही था। वैसे भी उस टाइम में अगर कोई विद्यार्थी का विद्वत्ता देखना है तो 2 ही कोहचन पूछा जाता था - बताओ बाबू कौन क्लास में है औऱ केतना तक पहाड़ा आता है। बस मने समझीये मानक फिक्स किया हुआ था सबका। जैसे पहला क्लास में गिनती 100 तक पहाड़ा 2 का, दूसरा क्लास में पहाड़ा 10 तक, तिसरा 30 तक, चौथा 40 तक...!
और किसी को कबलइति झड़ना हो तो 13 का पहाड़ा सुनाने बोल दिया जाता था। 13 ,17 ,19, 23 ई सब का पहाड़ा पूछना मने सियोर शॉट टाइप कोहचन था। कठिन भी रहता था सो हमलोग भी केतनो याद के बाद सुनाने टाइम डरते ही थे कि भूल न जाये। अब बहुत के आदत का रहता था न कि उससे पूछिये कि 17 नवां तो उ डायरेक्ट न बता के शुरूआत से पहाड़ पढ़ना स्टार्ट कर के तब बताता था। अउर ओकरे में खरखाह बने वलन आदमी नेगेटिव पॉइंट निकाल के चल जाते। फ़िर हो गया आपका क्लास घर में अउर का! अब जब तक एक हफ्ता तक पूरा पहाड़ा न सुनाए तो दुनो टाइम के ताना के लिए रेडी रहिये।
हमारे गुरुजी पहाड़ा भी दोहा में रटवाते थे। दूनो बेरा सब लइकन के लाइन में लगवा के ग्रुप सांग जैसा गिनती पहाड़ा गवाया जाता था। शुरू करो जी - "एका एक, दुआ दु,... चौके चार... दू पर सोना बीस"
पहाड़ा में भी कुछ कुछ पहाड़ा बहुत फेवरेट माना जाता था, जैसे 5, 10, 11, 15 ,20 ,21 25 ई सब। लेकिन जे मजा 15 में था उ कहीं नहीं। हमलोग जब मामा घर राँची जाते थे तो स्पेशल सब बुला बुला के 15 का पहाड़ा पढ़वाते थे। तो चलिए आपलोग को भी सुनाते है 15 का पहाड़ा-
पंद्रह का पन्द्रह (15)
दुंनी तीस (30)
तिया पैंतालीस (45)
चउंके साठ (60)
पंजे पचहत्तर (75)
छके नब्बे (90)
सते पचोतर (105)
अठे बीसा(120)
नवे पैनतीसा (135)
झगड़ मगड़ के डेढ़ सौ (150)
मूंगड़ी अढ़ाई सौ!
आपलोग के गुरुजी कउनो और तरीका से इयाद करवाये थे का? ठेठ पलामू के साथ जरूर शेयर किजिये।

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