#ठेठ_पलामू : Redma Chowk की काली माँ
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रेड़मा चौक वाली काली माई पलामूवासियों के दिल में रहती हैं. यह कहना ज्यादा नहीं होगा कि हम सब के लिए मंदिर का मतलब ही काली मंदिर होता है.
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रेड़मा चौक वाली काली माई पलामूवासियों के दिल में रहती हैं. यह कहना ज्यादा नहीं होगा कि हम सब के लिए मंदिर का मतलब ही काली मंदिर होता है.
आज भी महीना में दू-चार गो चीज़ तो गछिये देते हैं इहाँ के नाम पर. मैट्रिक पास होने पर, लइका पैदा होने पर, जन्मदिन के अवसर पर, नौकरी, बाराती, नयका गाड़ी खरीदने की ख़ुशी- ऐसी तमाम छोटी बड़ी खुशियों में यहां के बाशिंदे काली मंदिर नहीं जाएँ ऐसा होइए नहीं सकता है!
केतना के तो बियाह भी इहंई ठीक हुआ है. चाहे छेका-बरछिया, चाहे देखा-देखी जइसन रस्म सब भी खूब होते रहता है इहाँ.
बहुत लड़कों का तो यही मानना है कि गर्लफ्रेंड भी माता रानी की कृपा से ही मिली है.आउ ब्रेकअप होने पर दू गो नारियल गछने पर उनकी जानू वापस भी आ जाती हैं.
शनिचर था! अगर आप नहीं गए थे तो अगला शनिवार जरूर चल जाइएगा. हमार तो जन्मदिन था इहे ला जाना तो कंफर्म था, वैसे हम तो रेग्युलर भक्त हैं न...
© Sunny Shukla
© Sunny Shukla

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