इस पौराणिक कहावत को याद दिलाता है ऐतिहासिक मेला जो पलामू किला में लगता है. खूबसूरत ओरंगा नदी और बेतला जंगल की शानदार खूबसूरती के बीच शानदार मेला. हजारों लोग खींचे चले जाते हैं हर साल.
लेकिन कहीं न कहीं हम सब ठगे हुए महसूस करते हैं जब तलवारों और हथियारों के जगह प्लास्टिक के पिस्टल देखते हैं मेले में और पकौड़ों के महक के जगह कुरकुरे लटके मिलते हैं.
लाल दीवारों को तो गुटखा ने और लाल कर ही दिया है बीचोंबीच में 'पिंकी लव्स पप्पू' के तीर दिल को चीरते हैं. ना वहां तक पहुंचने का रास्ता बन पाया है न मोबाइल का नेटवर्क.
नक्सली हिंसा में कमी शायद अब लोगों को जाने का न्योता मिले. कसम से किसी भी जंगल से ज्यादा खूबसूरत है हमारा पलामू किला से दिखने वाला जंगल.
तो आइये सेल्फी लीजिये किला से आउ इम्प्रेशन मारिये अपनी वाली पे.
इन ढहती विरासत और दीवारों को बचाएँ इसी बहाने.

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