Monday, May 21, 2018

गमछा

#ठेठ_पलामू : गमछा
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भोरे भोरे सो के उठे तो सुने बाबा बड़ी गुस्सा रहे थे। "कहाँ छपित हो गेलइ उहइ तो रखले हली।"
हमहुँ आँख मइसते सोचे कि का भुला गया जे एतना हल्ला हो रहा है? तभी चाची आ के बतायी कि हरीयरका गमछी नहीं मिल रहा है। हम बोले कि अरे उ नही मिल रहा है कौनो दोसर नहीँ है का? तो कहने लगी 4 -5 ठो है लेकिन उहे चाहिए। खैर छोड़िये बाद में मिल गया, चाचा कपड़ा आयरन करवाने के लिए धोबी के पास दिए थे उसी में साथ मे चला गया था।
पर हमारे पलामू और गमछा का बड़ा बेजोड़ कॉम्बिनेशन है। खादी भंडार से खरीदल अधी का कुर्ता पायजामा और पैर में ब्राइट शू का चप्पल के साथ जब तक कंधा पर मैचिंग गमछा नही रहेगा तब तक समझिये हमलोग का कॉन्फिडेंस ही नही आवेगा। भले आज कल के लइकन वुडलैंड के जूता, लेविस का जीन्स, sparky का शर्ट और raybon का चश्मा पहिन के निकल जाए पर सूती उजर गमछा जब तक गर्दन में न बंधाएगा मजे नहीं आता है। और हो भी काहे नहीं, मल्टीपरपस आइटम ही ऐसा है! गर्मी में लहर लगे तो बांध के चेहरा छुपा लिए। लड़की के बाबूजी के सामने उसको बाइक से गमछा बांध के निकल जाइए, हराम जे पहचान ले। जाड़ा के दिन में मोफलर बना लिए। बरसात में कपड़ा भीग जाये तो बस पहिन के गमछी सब कपड़ा खोलिये आऊ गार के पहिन लिजिये। ठेठ भाषा मे कहा जाए तो हमनी का चलता फिरता चेंज रूम है।
कहीं हित-नाथ में गये हैं और ट्राउज़र नहीं ले गए हैं तो कौनो टेन्सन नहीं है, गमछा है न! फर्स्ट क्लास पहिन के सो जाइये। अउर रात में मछर काटे तो खोल के ओढ लिजिये। अरे कभी कभी अगर आदमी दिन भर गमछी में मिल जाये तो अइसहीं लोग जान जाता था कि आज एकर पेट खराब है।
फिल्मी फैशन के साथ साथ भले लइकन का हेयर स्टाइल चेंज हो जाये, कपड़ा चेंज हो जाये पर गमछा दादा जी भी लेते थे बाबूजी भी लेते रहे है और हमहुँ लेते रहेंगे।
ई गमछा हमीन पलामू वासी का पहचान है।
© Anand Keshaw
पोलपोल, पलामू

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