#ठेठ_पलामू : पानी भात
गर्मी के दिन में पानी भात अचार और सुबेरे नयका चावल के माड़ भात...बड़का बड़का रेस्टोरेंट के खाना फेल जी एकर आगे.
वो स्वाद जो आत्मा तक उतरती थी, अब न जाने कहाँ खो गई है? कोशिश भी की उस स्वाद को ढूंढने की, परन्तु शायद फ़्राईड राइस और ज़ीरा राइस के स्वाद में वो प्यारी सी स्वाद भी खो गई!
रसना के लिए लड़ना भाई-बहन से ये तो पुरानी यादें हो गई. अब के बच्चे भी रसना के लिए नहीं लड़ते. क्यूंकि उनके लाइफ में kinder joy के सरप्राइज गिफ्ट ने मस्ती भर दी है. लड़ाई तो है लेकिन वजहें बदल गई है.
घर में व्यपारी लूडो की जगह यूट्यूब ने ले ही ली.
ख़ैर यादें ताज़ा करने के लिए ही सही उसना चावल के माड़-भात आउ पानी-भात ट्राई कीजियेगा अच्छा लगेगा.
वैसे केमिकल वाला सब्जी खा खा के सब का जीभ बिगड गया है, अब फूटानी वाला अमीरी का आदत न लग गया है. अकाल पड़े एक बार फिर से तो याद आ जाएँगे पानी भात और गुठली वाला अचार... प्याज काट कर और बूट फूला के मिला कर. सबसे मजेदार आखिरी में थाली उठा कर पानी पीने का रस्म... ओह!
ए जी, सुन रही हो! आज चिकेन का प्लान कैंसिल करो! ई शुकुल मूड बना दिया है....
ए जी, सुन रही हो! आज चिकेन का प्लान कैंसिल करो! ई शुकुल मूड बना दिया है....
"सन्नी शुक्ला"

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