Thursday, May 24, 2018

पलामू के गरमी

बाप रे!
ई पलामू के गरमी
लहर में मूंह जात बा सूख
आऊ लागतो नइखे भूख.
बूढ़वन पीअत सत्तूआ अमझोरा
पेप्सी मांगे नन्हका छोरा
किरिण फूटते डहर बा खाली
धूप ई सबके जान निकाली
करिया हो गेल घाम से चाम
अब फेरन लवली कईल न काम
रहते नईखे जरको बिजली
मारे पसेना होखे खुजली
कूलर ए.सी सब बा फेल
पकिया घर तो लागे जेल
खपड़ैल घर काहे ढह गेल?
कहां हेरा गेल घड़ा के पानी?
मिसरी बतासा मांगे नानी
ठेठ पलामू से बा बिनती
पेड़ लगाऊं कर के गिनती
अगला गरमी आऊ जादे होई
काजनि बचिहें कि ना कोई?

© दिव्या रानी
अनुवाद : सत्यान्वेषी स्वामी

पंखा कूलर फेल होइल, लाईन जे कट जाई.

इन्वर्टर भी २ घंटे में करे लगे माई गे माई. 

लेली एगो बेना साथ में एगो चटाई ,
अब तो पूरा दिन एकरे से कट जाई.

दही मठा भर डूभा खा के ल अंगड़ाई.
चाट चौमिन के फेरा मे लुक लहर लग जाई.

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