Wednesday, December 28, 2022
'बोरोलीन'
Monday, December 26, 2022
Sunday, December 25, 2022
" बड़ा दिन बोले तो "
Saturday, December 24, 2022
" बोरसी "
Thursday, December 22, 2022
New film
पलामू के धरती से एक से बढ़कर एक कलाकार पैदा हुए हैं. कुछ को हम जानते हैं कुछ से अनजान. ठेठ पलामू की कोशिश है कि हम आप सब को पलामू के ऐसे रत्नों से मिलवाते रहें.
Wednesday, December 21, 2022
" ओभर-ब्रिज "
मूर्ख होते हैं वो, जो ओवरब्रिज से नीचे उतरते समय साईकल पर पैडल मारते हैं - ये डॉयलॉग हमारे हिंदी वाले गुरुजी का मनपसंद वन-लाइनर था।
डालटनगंज के ओवरब्रिज पर चढ़ते समय कभी सोचे हैं कि ये ओवरब्रिज कितना अभिन्न अंग हो चुका है हमारे जिंदगी का? आम दिनचर्या का वो हिस्सा है ये, जिसे हम नोटिस भी नहीं करते, बस कचहरी के सामने से चढ़ते हैं और रेडमा चौक पर उतर जाते हैं। कहते हैं ना कि किसी चीज की महत्ता तभी पता चलती है जब उसकी कमी हो। आज की पीढ़ी को अंदाजा भी नहीं कि जब ओवरब्रिज नहीं था, तो कितना वक्त बर्बाद होता था, कितना घूम कर जाना पड़ता था, कितना रेलवे क्रासिंग पर इंतेजार करना पड़ता था।
अब तो शहर में ढेरों ओवरब्रिज हो गए हैं, लेकिन एक वक्त जब ये अकेला था, तो ऊपर चढ़ कर मैं नीचे जाती ट्रेन देखे बिना कभी आगे नहीं बढ़ती थी। गर्मी में ब्रिज के ऊपर सर्र सी जाती हवा के थपेड़ों में जहाँ आत्मिक सुख की अनुभूति होती थी, वहीं ठंड के दिनों में ये अनुभव हाड़ कंपा देने वाला था। पुल के नीचे गिरजा घर के घंटे की ध्वनि, किसी रेलगाड़ी के आगमन से उत्पन्न मोहक तस्वीर, ऊपर से किसी दुपहिया, चारपहिया, चरणजीप में सवार हो कर जाते आप...अगर मन थोड़ा भारी या स्ट्रेस में हो, तो आप देख भी ना पाएंगे औऱ ये पुल यात्रा समाप्त हो जाएगी। लेकिन किसी दिन सुबह 5-6 बजे, दोपहर 3:00- 4:00 या रात में 11:00 बजे के बाद ये करके देखिये कितना मज़ा आता है, निर्मल आनंद है ये।
बहरहाल दिन भर में कई बार हम ओवरब्रिज के ऊपर नीचे चढ़ते उतरते हैं। बिना ये जाने की इसी आनंदमयी पुल के नीचे, आबादगंज के तरफ वाली सडक से सटा हुआ - छुटकी मुनिया का घर है जो कई बार बस-उजड़ चुका है। दहिसर भूईयां रेलवे क्रासिंग औऱ पेट्रोल पंप के बीच एक बहुत ही कामयाब चाय-समोसा-बन का दूकान चलाते हैं औऱ जो ये रेलवे फाटक आगे जाकर आबादगंज औऱ जेलहाता को जोड़ती है ना, उसके फाटक को नजरअंदाज़ करके मालगाड़ी से कोयला चोरी कर के भाग रहे अजईया ने अपना एक पैर पिछले साल गवां दिया था। जब पुल नहीं बना था 1980 के दशक के पूर्वआर्द्ध तक, ऐसी घटनाएं औऱ ज्यादा होती थीं।
Monday, December 19, 2022
" ठाट "
पहिले खपड़ा वाला घर के छप्पर छवात रहे, ओकरा हमनी "ठाट" करेला कहअ हली। उभी का समय रहे, बिना पईसा के पुरे घर के एक दिन में ठाट हो जात रहे।







