जब ठंड से दाँत किटकिटा रहे हों और आप बाबा रामदेव का आलसी वाला हथेली रगड़ योग कर इत्त-बित्तु गर्मी पैदा करने की कोशिश कर रहे हों, बोले तो ठंड में कोंकड़ा गए हों। आप और आपका बुतरू दूनो फाटल गाल की रक्षा के लिए 200 रुपया वाला चेरी-फ्रूट कचुमर वाला चैपस्टिक चपोत रहे हों, तो बूझिए बढ़िया ठंडा पड़ रहा है।
बोरोलीन-बोरोप्लस तो आजी-बाबा के लगावे के चीज रह गया है। सुपर मार्केट में कोई पूछबो नहीं करता है, इतना सारा क्रीम आ गया है, डे-क्रीम, नाईट-क्रीम, मॉइस्चराइजर-क्रीम, तैलीय स्कीन क्रीम, सुखल स्कीन क्रीम, दूध क्रीम, हल्दी क्रीम मत कहिए का नहीं डाल के क्रीम बनाता है सब।
पलामू की ठंडी में हम सभी बच्चों के गाल फट कर चकत्ते-चकत्ते हो जाते थे। रात में मम्मी याद से होंठो और गाल पर सोते समय बोरोलीन लगा देती थी। ये आदत ऐसी रही कि कहीं भी रहूँ, बैग में बोरोलीन की एक ट्यूब जरूर पड़ी रहती है। बोरोलीन के बारे में एक सीक्रेट बात है, खास करके रगड़-रगड़ के चेहरे को स्क्रब कर बोकला छुड़ाने वालों के लिए। ढेर सारा बोरोलीन चेहरे पर रात में मल कर सो जाएं और सुबह में गीले तौलिए से रगड़ कर पोंछ लें, किसी भी स्क्रब से हज़ार गुना कारगर उपाय है ये।
ऐसा नहीं है कि बोरोलीन पर भरोसा रातोंरात हो गया है, पूरी आधी शताब्दी का विश्वास है ये। फटी हुई एड़ियों को डालडा पीला कर सुलाने से लेकर, इतवार को चापाकल, कुआं या तालाब के पत्थरनुमा घाट पर ईंट से रगड़ के चिकनाई प्रदान करने तक सब आजमा चुके। नेनुआ का झांवा, प्युमिक स्टोन और फैंसी पत्थर से समय का पहिये घूमते-घूमते बोरोलीन तक जा कर रुक गया। कहीं कट-छट गया हो, कहीं जल गया हो, कोई कीड़ा काट दे या ठंड में फटे होंठ, फटे गाल, फ़टी एड़ियां सबका एक ही इलाज "खुशबूदार असरदार एन्टीसेप्टिक क्रीम बोरोलीन।"
कहते हैं बस एक जले, टूटे और आतंकित दिल को छोड़, बोरोलीन सबकुछ मरम्मत कर देता है। हमको तो शक है कि कलेजा में लगा के कोई देखा नहीं है, ट्राइ करने में क्या हर्ज़ है, हो सकता है वो भी फिक्स हो जाये। क्या पता? तो बस, अपने थोबड़े पर बोरोलीन वाला स्माइल चिपकाइये औऱ दुनिया जीत लीजिये।
आज FMCG प्रोडक्ट के दौड़ में कहीं पिछुआ गया है हमारा बोरोलीन। लेकिन साथ में पीछे छूट रही है वो गर्माहट, वो अपनेपन की महक, वो बाकी इन्द्रियों पर हावी सुगंधैनींदरी, जिसकी कूवत आपको चुटकी बजाते घर की यादों सी थपकी देने में कामयाब होती थी, तो लगे हांथों बोरोलीन चपोतिए और मस्त यादों का पिटारा खोलिए कमेंट बॉक्स में।

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