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भवन निर्माण के प्रक्रिया में दो दिन का एक अपना महत्व और उत्साह रहता है। एक बुनियाद माने गृह आरंभ के दिन और दूसरा घर ढालने के दिन। एक दिन मने जैसे कि आदमी अपना उपलब्धी शुरू करने वाला हो और दूसरे दिन जैसे अपना उपलब्धी प्राप्त कर लिया हो।
माने एकदिन शुरूवात का उत्साह रहता है तो दूसरे दिन काम को अंजाम तक पहुंचा देने वाला जो गर्व मिश्रित संतुष्टि रहता है न, ऊ अलगे लेवल का होता है।
लेकिन आज बुनियाद पे बात नहीं आज बात बतीयाएंगे ढलईया के। तो बात इ है कि बहुत कशमकश जुगाड़ और तैयारी के बाद कल हमारा घर ढलाने वाला है। आऊ इ दिन तो घर में महौले अलग होता है। तैयारी चाहे केतना भी कर लीजिए लेकिन ढलाई वाला दिन इतना न भागदौड़ हो जाता है कि भगवान से यही प्रार्थना होता है कि बस सब काम बढ़िया से निपट जाए। ऊ दिन मने नहियों पर तो कम से कम पांच सौ फोन घुमाना पड़ता है कभी राज़ मिस्त्री के तो कभी मज़दूर के तो कभी कौंनटेकटर के।
माने बस ईहे समझ लीजिए कि खाहू-पीहूं के फुर्सत नहीं रहता है...फ़ोन पर इतना न छड़ बालू सीमेंट हो जाता है कि कोई पूछता भी है कि का खईले बाबु, तो मुंह से निकल जा रहा है छड़-बालू-सीमेंट। ढलाई के दिन काहे की काम एके दिन मे ख़तम करना होता है सुबह से ही मज़दूर से लेके मिस्त्री मे अलगे उत्साह और जोश नज़र आता है। ढलाई अगर तनी बढ़न हो तो तीन चार गो राज मिस्त्री का जुगाड़ करना पड़ता है और अईसन में रिस्क भी होता है मिस्त्री लोग के बीच टकराव होने का। माने जे सीनियर मिस्त्री है, ऊ अलग रौब में रहेगा, लेकिन जूनियर भी तो बाहर शहर में काम करके आया है न, तो उ अलगे टशन में रहेगा। तो इ सब के मैनेज करके चलना पड़ता है, न तो कई बार गरमा गर्मी भी हो जाता है माहौल में।
हाँ, तो ढलाई के काम शुरू होवे से पहिले विश्वकर्मा भगवान के पूजा करके और बड़का बुनिया वाला लड्डू से सबके मुह मीठा करके काम ईस्टाट होता है। ढलाई के दिन घर के गार्जियन के लोड भी बढल रहता है, सब आपन-आपन हिसाब से काम के लोड लेके लगल रहते हैं। पापा-तनी देखत रहेंगे की कोन कोन लेबर लेट से आ रहा है, कोन टाईम पास कर रहा है, चाचा उधर व्यस्त रहेंगे की ढलाई वाला काम में कोनों कोताही ना हो जाए, कने लेबल हाई रखना है, कने से पानी के निकासी देना है, मसाला बने में लेट काहे हो रहा है, इत्यादि।
आज के दिन घर ढलाना है, इ तो बात मने गांव घर मे हाला होइए जाता है, काहे की घरे के आदमी सब दु-तीन दिन पहिले से ही ढलाई वाला दिन के अपन सब अपॉइंटमेंट माने 'काम काज बंद रहेगा' कहले फिरते हैं। गांव के तो आपन एक अलगे बात है न, तीन तरह के सलाहकार मौजूद रहता है ढलाई के दिन, एगो मन से, दूसरा बेमन से और तीसरा जलन से। आऊ तीनों आपन आपन बहुमूल्य सलाह उचित समय पर देते रहते हैं।
1. मन से - ठिके कईली ढलवा लेली से, परिवार बढ़त रहे घर बनही के चाहत रहे, कुछ काम होई तो कहब ओटवा पर बईठल ही तनी।
2. बेमन से - सीमेंट कोन लेली बाबा acc का तो lafarz के बढ़िया होवा ला चलूँ जाए देऊ ईहो ठिके रही।
3. जलन से -लेकिन एक बात माने ला पडी केतनो पाका के घर बना ल माटी के घर के मज़ा ही अलग बा।
इहे सब महत्वपूर्ण सलाह विचार के साथ ढलाई के काम आगे बढ़sला और लास्ट मे यही भगवान से प्रार्थना रही कि आज ढलईआ के दिन सब काम बढ़िया से हो जाओ....जाईत ही तनी काम देख लेवत ही। सच कहूँ तो इतना टाइप करत भर में पांच गो मिसकाल आ गेल बा, आऊ रऊअन ढलईआ से जुड़ल आपन ईयाद कमेन्ट बाक्स में जरूर से शेयर करूं ।
© बिधू शेखर पांडेय

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