Monday, May 21, 2018

नैइकी कनिया का दूल्हा

#ठेठ_पलामू : नैइकी कनिया का दूल्हा
-------------------------------------------------
लाल सुर्खी लहठी, पीला गोटपणीं वाला साड़ी, बड़का लाल टिकुली और टहटह लाल सेंदुर में शर्माती हुई लोअर बर्थ पर कनिया बैठी है. माथा पर से अचरा सरक कर बालों के जुड़ा पर अटका हुआ है. दूल्हे को आता देख अचरा संभाल कर माथा पर से ओढ़ लेती है. पैर को जो ऊपर की तरफ मोड़ कर बैठी थी, अब उसे नीचे रखे चप्पल में फंसाने की कोशिश करती है. इस हिलने-डुलने में उसकी लहठी और पायल दोनों की आवाज़ साथ में आती है.
दूल्हा चाय के साथ चिप्स का पैकेट भी उसकी तरफ़ प्यार से बढ़ाता है. वो सिर्फ़ चाय लेती है चिप्स नहीं. दूल्हा थोड़ा इसरार करता है तो लज़ाते हुए एक चिप्स लेती है और खिड़की मुंहे घूम कर खा लेती है.
दूल्हा की नज़रें उसकी हर हरकत को अपनी नज़रों में बिठाये जा रहा है. कनिया भी ई बात जान रही है.
उसका अचरा अब माथा पर टिक कर बैठा है. दूल्हा सोचता है कि ये थोड़ा सरक कर नीचे आ जाये मगर वो हिलता भी नहीं. वो ठीक से बैठने की कोशिश में थोड़ा सट जाता है अपनी कनिया से. अचरा भी हल्का सरक जाता है. कनिया ठीक से रखने के लिए हाथ उठाती है मगर दूल्हा आँखों से कुछ कह देता है. वो फिर से खिड़की की ओर देख मुस्कुराने लगती है.
दूल्हा हल्का टेढ़ा होते हुए उसके कंधे की तरफ झुकता है. अबकि वो कंधा नहीं हटाती. दूल्हे ने ऑंखें बंद कर रही है. उसके कनिया का केस उड़ कर उसके पेशानी को चुम ले रहा है.
थोड़ा और वक़्त गुज़रता है. साँझ धीरे-धीरे से ट्रेन के उस बॉगी में उतरने लगता है. कनिया अब अपने बाल को समेटने के लिए हाथ दाएँ कंधे पर ले जाती है. गलती से उसकी अंगुलियां छू लेती है अपने दूल्हे के गालों को. वो नज़रें घुमा कर देखती है उसे. थोड़ी और देर तक देखती है.
फिर हौले से उसके गर्दन को सरका कर अपने गोद में उसका माथा रख लेती है और अचरा से उसका चेहरा ढ़क लेती है.
दूल्हा शायद जग चूका है मगर उसे अपनी कनिया का गोद पहली बार मिला है इसलिए बंद आँखों से उसे महसूस कर रहा है. वैसे कनिया भी ये बात जान रही है कि, वो जग चूका है लेकिन उसे भी अपने दूल्हे को गोद में लिटाये रखना है.
उसके बालों को छूने की कोशिश में मेहँदी वाली हथेलियों को अचरा के भीतर लाना है और फिर दूल्हे को उसका हाथ थाम कर अपने होंठों तक ले जाना होता है. ऐसा करते हुए दूल्हा अपनी ऑंखें खोलता है और फिर से कनिया खिड़की मुहे हो कर लजाने लगती है.
© anu roy

No comments:

Post a Comment