#ठेठ_पलामू: झूलन
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डालटनगंज के पब्लिक को राखी पर्व का इंतजार राखी बंधवाने से ज्यादा झूलन के लिए रहता है.
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डालटनगंज के पब्लिक को राखी पर्व का इंतजार राखी बंधवाने से ज्यादा झूलन के लिए रहता है.
आज शरलौक होम्स का जासूसी सीरियल देख रहे थे तो लंदन वाला दुनिया का सबसे बड़ा झूला दिखाई दिया. अब चुकी हम ठहरे Sherlock के सबसे बड़ा फैन, हम भी आपन अगल बगल में जासूसी का कौनो मौका नहीं छोड़ते हैं. इसीलिए हमार लंदन यानी डालटनगंज के झूला को याद करना तो जरूरी हो गया.
बचपन से आज तक इहाँ का दृश्य हमारे लिए यादगार है. आऊ वैसे भी सावन तो झूलन के बिना अधूरा है. उ तो गाना भी है न गदर फ़िल्म वाला.
बड़का झूलन के टॉवर, आउ वहाँ टॉप से नदी का नजारा. ऊंचाई से डर भी लगता है, acrophobia कहते हैं न इसको. धक धक! दिल लगता था सीना चिर के बाहर आ जाएगा. लेकिन पैसा दे दिए हैं तो वसूली भी तो करना है एक सच्चे पलामू वासी की तरह. नीचे उतरने के बाद लगता कि- वाह! जिंदा बच गए. सही में ठीक बोलता है कोल्ड ड्रिंक के प्रचार वाला - डर के आगे जीत है.
नाव वाला झूला में बैठ के लगता था की नदिये में बिगा जाएंगे. लेकिन सामने में बैठ गयी थी मोहल्ला वाली. अब इम्प्रेस भी तो करना था. हालांकि जल्दी ही दोनों का स्थिति एक दूसर से छुपल नहीं रहा. उतरने के बाद नजर चोरा के भागे...
मौत का कुँवा देख हमेशा सोचते थे कि बड़ा होंगे तो हम भी वहाँ मोटरसाइकिल चलाएंगे. फिर उ whatsapp पर एगो वायरल विडियो देखे आजकल. मिजाज गनगना गया. केतना खतरनाक मौत का कुआं. सही मे करेजा चाहिए जी, 5 रुपया का टिकिट में आपन जान डाल देता है उ लोग.
मिना बजार का खिलौना, क्लास वाली को देख मुस्कुराना, के केकर साथे नजर लड़ा रहा है ये धरना, गोल गप्पा, चाट पर अटैक, और सिंगार स्टोर से आपन वाली ला कनबालि और लिपिस्टिक खरीदना...
कसम से एक बार और जिंदगी में वही मज़ा लेना चाहते हैं. वो मजा कोलकाता दिल्ली का महंगा से मंहगा पार्क भी नहीं दे सकता है.
बेमौसम मूड बन गया तो एल्बम खोल के फोटो देखने लगे. आपलोग भी देखिए.
© सत्यान्वेषी स्वामी और Sunny Shukla



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