#ठेठ_पलामू:-15 अगस्त
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15 अगस्त मने स्वतंत्रता दिवस आऊ 26 जनवरी मने गणतंत्र दिवस। अब अगर पढ़ाई-लिखाई के बात करल जाए, तब तो दुनो में असमान-जमीन के अंतर हो जाए, लेकिन लईका में ओकर से कोई मतलब नहीं रहे। दिवस कोइयो रहे, फहरावेला तो झंडे न रह हलक। हमीन के मतलब रहतक #प्रभातफेरी, झंडा, लड्डू, चॉकलेट, #भाषण आऊ प्राइज से।
भोर होइते स्कूल वाला प्रभात फेरी अलगे रह हलक। हमीन गाँव के लईकन 4 बजे भोरे में उठ के गलिये-गलिये घूम जईती। महात्मा गांधी अमर रहें, #सुभाष_चंद्र_बोस जिंदाबाद, #डॉ_लोहिया अमर रहें, 15 अगस्त अमर रहे। इहे सब नारा लगा लगा के तबतक घुमती जबतक गाँव भर के आदमी सब उठ न जईतन। ओकर बाद नहा-धो के साफ करल ड्रेस पहिन के सीधे पहुँच जईती स्कूल। सबसे पहिले अापन स्कूल में झंडा फहरा के ओकर बाद बाकी सब स्कूल में भी पहुँचे के जल्दी रह हलक, कि कहीं के लड्डू छूट न जाए।
अापन स्कूल में वइसे भी सबसे पहले झंडा फहरा देव हलन। काहे कि अब हमीन के स्कूल हलक सरकारी तो बस राष्ट्रगान गवा के काम खत्म, जादे-से-जादे में लड़की सब हिन्द देश के प्यारा झंडा सुना देतन बस आऊ का। एकाध गो भोजपुरी गाना पर जोड़ल गीत रह गेलक तो बड़ी भाग से सुने ल मिल जईतक। हाँ, हर बार 2-3 दिन पहिले एगो किताब बेचे वाला जरूर आव हलक। एक दिन आके किताब देखा देतक और अगला दिन पैसा लेके अइती, तो किताब लेवे में सबसे आगे। #देशभक्ति गाना के किताब, गणित के फॉर्मूला के किताब सब ले लेती भले कभी पढ़ती ना उ अलग बात हलक। देशभक्ति किताब में अईसन-अईसन गाना रहतक जे ना तो उ घड़ी सुनने हली, न आज तक सुनले ही ।
ओकर बाद अगल-बगल के प्राइवेट स्कूल में जा के झंडा फहरइती। सबसे मज़ा अइतक भाषण प्रतियोगिता में, जे सब स्कूल में होव हलक। सब के उहे रटल-रटावल भाषण। आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, भाइयों एवं बहनों वाला लाईन और केतना तो आधे में जा के जय हिंद, जय भारत। गांव भर में कुछ आदमी भाषण लिख हलन, तो सब उनकरे पास पहुँच जईतन लिखवावे ला । अब उहो केतना वेरायटी लनतन, सब के एके जइसन हो जईतक । हालांकि एगो चाचा हलन जे बाद में प्रेस रिपोर्टर भी बन गेलन । उनकरो भी पूरा शौक रहे कि उनको से भी कोई भाषण लिखवइतक। एगो स्टूडेंट खोज के बड़ी मुश्किल से रटावल गेलक। उहो बेचारा जय हिंद, जय भारत कर के भाग गेलक। बेचारा चाचा भी साइड से निकल लेलन आऊ का। लगभग 90% लड़कन के एक ही टॉपिक रहतक कि "हम आजाद तो हो गये है, लेकिन आज भी गुलामी की जंजीर में जकड़े हुए हैं।"
प्राइवेट स्कूल में भाषण अंग्रेज़ी में देवे के अलगे फैशन रहे। हिंदी में तो बेचरन कुछ बोलबो कर हलन लेकिन अंग्रेज़ी में रिस्पेक्टेड के आगे ही गड़बड़ा जात रहन। ऊपर से सरकारी स्कूल के लईकन के साथे-साथे पब्लिक के कॉमेंट अलगे कि "अंग्रेज तो गेलन लेकिन अंग्रेज़ी छोड़ देलन।" ओकर बाद पुरस्कार वितरण समारोह में फर्स्ट पुरस्कार इंस्ट्रूमेंट बॉक्स, द्वितीय पुरस्कार पेंसिल बॉक्स, तृतीय पुरस्कार कलम और सबसे बढ़िया सांत्वना पुरस्कार क़टपेन्सिल।
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