#ठेठ_पलामू:- खिचड़ी
खिचड़ी वैसे तो कहावत है कि-
" खिचड़ी के हैं चार ईयार,
चोखा चटनी पापड़ अँचार।"
अब कहियेगा कि घीव कहाँ गया तो अब बिना #घीव से छनकाये खिचड़ी बनता है का? उ तो मने रहना ही रहना है। जानते हैं भले खिचड़ी को सब सादा खाना के रूप में भले ले ले पर अपने आप मे ई #छप्पन भोग से कम नहीं है। #शनीचर और खिचड़ी दुनो का जो जोड़ी है न भगवान जी बना के भेजे हैं। इसलिए लगभग घर मे गरह काटने के नाम पर तो कहीं सब्जी बचाने के नाम पर या पेट को आराम देने के नाम पर बनता जरूर है।
अगर जाड़ा के दिन रहे तो इसका सवाद का तो फिर बाते अलगे हो जाता है। फस्ट क्लास #फूलकोबी, #हरियर मटर के दाना, गाजर, आऊ एकदम हाथ मे छूते #धमकने वाला धनिया के पता ई सब डाल के अगर खिचड़ी बन जाये तो फिर तो दुनिया के सब आईटम एक तरफ और #खिचड़ी एक तरफ। जैसे ही बन के निकले बस भर कलछुल घीव में #जीरा आऊ ललका मिचाई जरा के #छनका दिजीये । साथ मे एकदम आलू के चोखा #देहाती टमाटर और धनिया पतई के चटनी, पापड़ आउ #लेमो ,आम चाहे #अवरा के अँचार मिल जाये तो कब एक #थरिया के जगह डेढ़ से दु हो जायेगा पते नहीं चलेगा। सब से बड़ा खूबी भी इसमें ई है न कि कभी केतनो #चाँप के खा लीजिये तो जादे नहीं होता है। अपन टाईम से जगह धर लेता है कि सांझ के बाजार तरफ जाएं तो भूख भी सिंघाड़ा देखके आराम से लग जाये।
अब शनीचर गरह के अलावा पेट खराब रहे , छोट लईका के खाना ऊना नहीं पच रहा हो तो मूँग दाल के खिचड़ी खिलाने के लिए डॉक्टर भी कहते हैं। डेरा में रहे वलन लईकन के लिए तो हफ्ता में 3-4 दिन शनीचर ही रहता है, जब मन न करे खाना बनावेला बस खिचड़ी चढ़ा देना है कूकर में। आजकल तो #रेस्टोरेंट के मेनू में भी खिचड़ी मिलने लगा है। अब लिखते-लिखते हमको भी मन करने लगा खायला। अब आपलोग जइसे घरे तो हैं नहीं कि पढ़ते के साथ घरे बनवा के खा ले। तब शनिचरा गरह कटवाईये, खिचड़ी बनवाइये आऊ #चोखा #चटनी के साथे इत्मिनान से चाँप के खाईये।
@Anand keshaw

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