#ठेठ_पलामू:- आग तापना
अब ठंड ने अपना दमदार असर दिखाना शुरु कर दिया है। पलामू की ठंड तो, वैसे भी फेमस है। जी,हाँ! पलामू जिले में, जहाँ गर्मी के मौसम में #रिकार्डतोड़ गर्मी पड़ती है, तो वहीं ठंड के मौसम की कड़कड़ाती ठंड की बात भी निराली है।
शायद इसीलिए पलामू के नामकरण में भी #पाला शब्द का उल्लेख होता रहा है। चाहे यहाँ कितनी भी गर्मी पड़ती हो या हाड़ कंपाने वाली ठंड। हम अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से असहनीय गर्मी या कड़कड़ाती ठंड वाले मौसम पर हमेशा हावी रहे हैं।
अभी धीरे-धीरे तापमान नीचे जा रहा है। ठंड का प्रकोप भी बढ़ता चला जा रहा है। अपने गांव, #सिंगरा की बात करूँ, तो अपेक्षाकृत यहाँ कुछ ज्यादा ठंड पड़ती है। #कोयल और #अमानत नदी के बीच में बसे हुए इस क्षेत्र में नदी का बालू जब मौसम के अनुकूल हो जाता है, तो अन्य क्षेत्रों के मुताबिक हमारे यहाँ ठंड कुछ ज्यादा ही पड़ती है।
लेकिन हमारे यहाँ ठंड से लड़ने की गजब की तैयारी रहती है। मिट्टी की हांडी में #गोईठा का अलाव हो या #घोरान के बेकार बाँस और अनुपयोगी लकड़ियाँ, उसके साथ-ही-साथ हम सभी के घरों में रहरेठ का भरपूर स्टॉक भी रहता है। शाम ढ़लते ही घर का एक आदमी, अलाव जलाने की अपनी डयूटी में मुस्तैद हो जाता है। लगभग सभी घरों मे कुछ समय तक आग तापने का सेशन शुरु ही रहता है, जो सोते समय तक जारी रहता है।
यह समय होता है, हमारी सामूहिकता के जश्न का...। जब हड्डी गलाने वाली ठंड में, चाहे अमीर हो या गरीब, अलाव के सामने अपने हाथ से उस गर्मी को महसूस करता है। जो हमारी पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करती है। जब हम आग तापने के साथ-साथ अपने सुख-दुख को भी साझा करते हैं और साथ में बैठकर जीवन में आने वाली, सभी समस्याओं से जूझने का प्रण भी करते हैं। चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ हों, कठिन-से-कठिन समय में भी हम सबके साथ,अपने को मजबूत बनाते रहते हैं। किसी भी अन्य मौसम की तरह ठंड का मौसम भी हमारे लिए, हमारी ताकत बनकर सामने आता है।
©Ajay Shukla

No comments:
Post a Comment