Saturday, January 9, 2021

जमदियरी

 #ठेठ_पलामू:- जमदियरी

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बचपन से देखती आ रही हूँ, #दीवाली के एक दिन पहले मेरी आजी सबसे छुपाके एक दीया जलाती थी। दीया भी कैसा? पुराना! जो किसी पूजा-पाठ में जलाया जा चुका हो, घी के बजाय सरसों तेल में डुबोई बाती और दीये का मुख दक्षिण दिशा में हो। सारे सदस्यों के खाना खा लेने के बाद जब सभी लोग सोने की तैयारी करते, तब मेरी आजी घर के मुख्य द्वार के सामने दूर खोरी में दिया जलाती और लौटते वक्त भूल कर भी पीछे मुड़ कर नहीं देखती।
वर्षों बाद इस परंपरा को मेरी माँ, चाची सब वैसे ही निभाते आ रहीं हैं; जैसे मेरी दादी निभाती थी। बड़ी विचित्र पूजा है ये... बचपन में दीवाली के दिन जब गलती से हम बच्चे कोई दीया दक्षिण की तरफ मुँह करके रखते तो बहुत डाँट पड़ती थी। हम में से कितने ही बच्चे दीवाली के कारण दक्षिण दिशा कभी नहीं भूले। थोड़ी बड़ी हुई तो इस विचित्र पूजा के पीछे की कहानी समझ में आई। इसे #जमदियरी निकलना बोलते हैं। यानी #यमराज को प्रसन्न करने के लिए उनके नाम का एक दीया। ऐसी मान्यता है कि इस दिन यमराज के नाम का दीया जलाने से वे खुश हो जाते हैं और अपनी कृपादृष्टि पूरे परिवार पर बनाए रखते हैं। इससे किसी भी सदस्य की अकाल मृत्यु नहीं होती।
मेरी आजी ने हमलोगों को एक कहानी सुनाई थी। राजा #रंथी (रंती) और #जम्हराज (यमराज) की कहानी - "राजा रंथी बहुत बढ़िया राजा रहन ऊ आपन पूरा जिनगी में कौनो पाप के काम नाहीं कइले रहन, लेकिन तबो उनकर #दुहारी पर जम्हराज जी उनका लेवे आ गइलन। ई देख के उनका बहुते अचंभा होईल। ऊ आपन कसूर पूछे लगलन त पता चलल कि एक दिन अनजान से एगो ब्राह्मण उनकर दुहारी से भूखे लवट गइल रहे एहीसे यमराज आ गइलन। राजा रंथी अापन गलती सुधारे ला एक बरस के समय मंगलन अउर उ साल एक साधु बाबा के कहे से दीवाली से एक रोज पहिले रात में दीया बरलन और ब्राह्मण के भोजन करईलन। एह से जम्हराज जी खुश हो गइलन अउर उनकरा छोड़ देलन। बाद में राजा रंथी के स्वर्ग मिलल।"
अब सोचती हूँ मान्यताएँ, परंपराएँ, विज्ञान, पढ़ाई-लिखाई, आधुनिकता सब अपनी जगह लेकिन भारतीय महिलाएँ परिवार की रक्षा के लिए, उनकी समृद्धि और खुशहाली के लिए जो करती हैं, उसका पूरे विश्व में कोई मुकाबला नहीं है। हम सब को अपनी सभ्यता, संस्कृति, पर्व, त्योहार, मान्यताओं और परंपराओं पर गर्व होना चाहिए।
©Jaya Dubey
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