#ठेठ_पलामू के चित्र शृंखला के क्रम में, अब हम जिस चित्र को शेयर कर रहे हैं, वह एक रचनाकार की सह्रदयता कल्पनाशीलता और कलात्मकता को प्रदर्शित करती है।
जी हाँ! यह चित्र है - पलामू संभाग के रेहला के निकट ग्राम #गुरहा की। जिसे हमारे पास भेजा है- #राकेश_सिंह जी ने। फिलहाल डॉ.राकेश सिंह जी "हरप्रकाश जैन महाविद्यालय, आरा" में प्राध्यापक के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
रसायन विज्ञान में पी-एचडी डिग्री लेने के बावजूद उन्हें साहित्य और संस्कृति से बहुत प्रेम है। उन्होंने कई कृतियों की रचना की है। उनकी रचना "ठहरिए,आगे जंगल है" पर दूरदर्शन में टेलीफिल्म भी प्रसारित हुयी है। विभिन्न संगठन और प्रतिष्ठानों के द्वारा उन्हें ढ़ेर सारे सम्मान से भी नवाजा गया है।
फोटोग्राफी करने में उनकी विशेष रुचि है।
उनका कहना है कि - "पलामू का हूँ न!पलामू वह जगह है जहां के नयनाभिराम दृश्य देखकर कोई चित्रकार भी पागल हो उठे और अपने कैनवास पर रंगता चला जाए लेकिन फिर भी मन न भरे। मेरी तो एक कहानी का शीर्षक ही है- 'ओह पलामू !'
प्रस्तुति: अजय शुक्ला


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