#ठेठ_पलामू:- जन्मदिन की बधाई पलामू
आज नव वर्ष 2020 के आगमन के साथ ही हमारा #पलामू 128 वर्षों का हो चुका है। आज ही के दिन 1892 में पलामू जिला अस्तित्व में आया। इससे पहले 1857 के विद्रोह के बाद से यह #डालटनगंज में मुख्यालय के साथ एक उपखंड था। 1871 में परगना #जपला और #बेलौजा को गया से पलामू में स्थानांतरित कर दिया गया था। पलामू का प्रारंभिक इतिहास किंवदंतियों और परंपराओं से भरा है। स्वायत्त जनजातियाँ शायद अतीत में क्षेत्र का निवास करती थीं खरवार, उरांव और चेरो ने पलामू पर लगभग शासन किया। उरांव का मुख्यालय #रोहतासगढ़ में शाहाबाद जिले में था (जिसमें भोजपुर और रोहतस के वर्तमान जिले शामिल हैं)। कुछ संकेत हैं कि कुछ समय के लिए पलामू का एक हिस्सा रोहतासगढ़ के मुख्यालय के द्वारा शासन किया गया था।
पहले पलामू जिले के अंतर्गत लातेहार और गढ़वा भी शामिल थे। परन्तु 1991 में गढ़वा तथा 2001 में लातेहार स्वतंत्र जिले बन गए। पलामू अभी जिला और कमिश्नरी दोनों है। गढ़वा और लातेहार अभी भी पलामू कमिश्नरी के अंतर्गत आते हैं। पलामू का क्षेत्रफल लगभग 5000km² तथा जनसंख्या लगभग 19 लाख है।
पलामू का इतिहास गौरवशाली रहा है। यही कारण है कि हमें अपने आप को पलामू वासी कहने में गर्व महसूस होता है, तो नव वर्ष के साथ-साथ पलामू दिवस भी धूमधाम से मनाइए। हमारी यही कामना है कि गौरवशाली इतिहास, अनूठी संस्कृति और परम्पराओं वाला हमारा पलामू सदैव प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे। यदि आपके पास पलामू से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ या कुछ विशेष यादें हों, तो उन्हें हमारे साथ अवश्य साझा करें।
ठेठ पलामू के सभी पाठकों से कुछ महत्वपूर्ण सवाल किए जा रहें हैं , अपने उत्तर कॉमेंट में जरूर करें।
अगर पलामू को क्षेत्र विशेष पर पहचान दिया जाए तो यहाँ का क्षेत्रीय फल ,फूल, फसल, मिठाई, सब्जी, जानवर, पकवान, परिधान इत्यादि क्या होगा जरूर बताइयेगा।
सभी को पलामू दिवस और अंग्रेजी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।
@Divya Rani

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