#ठेठ_पलामू:- दशहारा के गोतिया घुमाई
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अबरी हमहूँ घरहीं थे तो मौक़ा मिला घूमने का। जब पहुँचे गोतिया घरे तो बड़ों से गोड़ छूके आशीर्वाद लिए आऊ हाल-चाल पूछे, जब नज़र घूमाए तो देखें कि लइकन सब नाया-नाया #डिज़ाइन के बाल कटवाके, कपड़ा पहिन के आऊ मोबाइल लेके कोना धईले है। आऊ नज़र छुपइले है कि गोड़ ना लागेला पड़े, आऊ जेकर नज़र गलती से पड़ गया ऊ ठेहुना छूके चल दिया। हम हैं छोट त हम घर के भीतरे भी घुस सकते हैं। भीतरे जाके चाची के गोड़ लाग के पूछे कि #भऊजाई कहाँ बड़ीन तो चाची कहीं कि का बताऊँ बाबू ऊ त अब लइकन के पढ़ावेला #डलटेनगंज में रहे लगलीन, हमानिए दूनो बूढ़ा-बूढ़ी ही ईहाँ।
फिर हम दूसर गोतिया घर गए, जहाँ याद है हमको कि 2 साल पहिले एगो बियाह में हम आए थे, अब उहाँ अंगना में एगो दीवार खड़ा मिला। शादी के बाद एक घर में #बेकत जितने बढ़े थे उतने चूल्हे एक ही घर में दिखे। दीवार के एहकर पानी पियेला #बिस्कुट-मिक्चर था, #गोबर से लीपल अंगना था, पुरनका #ललुआ वाला #ललटेन था, बईठेला #सूतरी के #खटिया आऊ दूरा पर पुरनका 24 इंचिया साइकिल त दीवार के ओहकर पानी पीयेला छोला-दहीबाड़ा था, घर में इन्वर्टर आऊ एल.ई.डी था, चमचमाता टाइल्स, बईठेला सोफ़ा आऊ दुरा पर नाया ट्रैक्टर, मोटसाईकिल आऊ कार।
हमर सामने दो अलग दशकों का जीता-जागता उदाहरण एक साथ था। जब तक हम छोलवा खतम कर पाते, ओतने देर में हमर बायोडाटा पूछा गया आऊ आपन लईकन, घर, ज़मीन, गाड़ी-घोड़ा आदि का मौखिक प्रदर्शन भी कर दिया गया आऊ मुझे ज़रूरत पड़ने पर मदद के लिए भी आश्वस्त किया गया। काश ऊ मदद वाला आवाज़ दीवार के ओह पार जा पाता। ख़ैर हमहूँ सब घर पुरावे ख़ातिर हाली-हाली पानी पीके दूसर घर निकल गए।
हमनी के समाज केतना तेज़ी से प्रगति और बदलाव की ओर है, ई त अबरी होलिए में नएका बदलाव देख के पता चलेगा। ख़ैर अईसन त रहल हमर गोतिया घुमाई, अब रउवन बताऊँ अापन अनुभव।
धन्यवाद!
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