होली सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है। ये एक मौका है, सारे गिले-शिकवे दूर कर लेने का। बचपन में जिनसे रूठ भी जाते थे, होली के दिन सब एक हो जाते थे, दिल हल्का हो जाता था। इस बार आप सब भी होली कुछ ऐसे ही मनाइए।
"इस #होली कुछ ऐसा हो जाए"
सुखी सर्द हवाएँ विदा होते
सुनहरी धूप का का सवेरा छोड़ जाए
सिकुड़ती बरफ की तलहट से
नन्हीं-सी अंकुर चीर आए।
चटकती कलियाँ, वो झूमती डालियाँ
आम की लहलहाती वो मंझरियाँ
सरसों की वो झूमती पत्तियाँ
पंछियों की चहचहाट ,
फूलों की वो महक
बागों मे आती हुई
बसंत का संदेशा दे जाए।
मौसम के बदलते करवट
कुछ इंसानों को भी सिखा जाए
सूनी-सूनी उसके मन के दीवारों पर
इस होली कुछ रंग सज जाए।
प्रकृति का श्रृंगार नया
तपिश का चढ़ता पारा
पर इंसान के अंदर
मन में जमी बर्फ पिघले कैसे ?
जैसे बदन रंग जाए
जैसे तन रंग जाए
इस होली मन भी रंग जाए।
थोड़ा लाल भी लग जाए
थोड़ा पीला भी जम जाए
इस होली नफरत की हर
दीवार मिट जाए।
कुछ केसरिया भी लग जाए
कुछ हरा भी लग जाए
धरम का हर भेद सिमट जाए
मजहबों की हर दूरियाँ मिट जाए।
होठों पर मुस्कान बिखर आए
उमंगों की लहर उमड़ जाए
बेरंग-बेसुरे उन दिलों मे
कोई नया राग छिड़ जाए।
प्रेम फुहार बरस पड़े
खुशियों की बौछार फूट पड़े
वृंदावन की वो बाँसुरी
हर दिल से बज उठे ।
काश! कुछ ऐसा रंग जम जाए
दिल का हर कोना रंग जाए
मन की अंतरंगी में भी
रंगीन फ़ुहार बरस जाए।
हर तान बज उठे,
हर कोना भींग जाए
दृश्य ये सच्चा हो जाए
हर रंग ऐसा पक्का हो जाए।
काश! इस होली रंग कुछ ऐसा जम जाए।

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