Saturday, January 9, 2021

ठेठ पलामू के जरिए

 ठेठ पलामू के जरिए हम सफर कर रहे हैं पलामू के इतिहास, वर्तमान और भविष्य में. हम गुजरते हैं उन गलियों से जिसके कोने में आपके बचपन की खुशबूदार बगिया है, जिसके चौराहे पर विरासत और संस्कृति के स्मारक हैं, जिसके एक तरफ स्नेह और मृदुल स्मृतियों की कतार है तो दूसरी तरफ जिम्मेदारियों की पंक्ति है जिनसे अवगत कराना हमारा उद्देश्य है.

सूचना क्रांति की उपज सोशल मीडिया की बदौलत तमाम जायज और नाजायज आंकड़े हमारी उंगली पे उपलब्ध हैं मगर उनमे से अधिकतर वैमनस्य और उन्माद बढ़ाने वाले होते हैं. हमारी कोशिश है कि बस एक क्लिक पर आपके चेहरे पर मुस्कुराहट की लकीर खिंच जाए.
बरसाती झुरमुट की तरह रोज ही सैकड़ों हज़ारों facebook पेज पनप रहे हैं और फिर लुप्त हो जा रहे हैं, कुछ तो newspaper cutting के सहारे जीवित है तो कुछ राजनैतिक या व्यावसायिक उद्देश्यों से प्रेरित. ऐसे में गैर विवादित मुद्दों पर निरंतर मौलिक और गुणवत्ता युक्त लेख प्रकाशित करते रहना हमारी पहचान बनी है, हमारी कोशिश रहेगी कि हम इस उद्देश्य में सतत सफल रहें. Facebook का यह इकलौता पेज है जिससे प्रकाशित होने वाले सभी लेख संपादक मंडली की अग्नि परीक्षा से होकर गुजरते हैं. हमारी संपादकीय समिति में हिंदी के प्रोफेसर, multinational company मे कार्यरत इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ इत्यादि लोग शामिल हैं जो निस्वार्थ भाव से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
एक मौलिक प्रश्न बार बार उठता है कि इसमे हमारा क्या फायदा? हम क्यों कर रहे हैं? हम भी स्वार्थी ही हैं, मनुष्य जो ठहरे. हमें संतुष्टि मिलती है जब हमारे भाव पाठकों के मनोभावों से तारतम्य स्थापित करते हैं. .
हम सर्वश्रेष्ठ हैं ऐसा नहीं है, समयानुसार सतत सुधार के लिए हम हमेशा सजग हैं. लेकिन जनसंवाद की प्रक्रिया एक तरफा नहीं हो सकती है, जरूरत है आपके विनिवेश की. आइए हम सब मिलकर एक सतह का निर्माण करें जहां विचारों का उन्मुक्त बहाव हो. हमें बताएं हमारी कमियों के बारे में, अपनी आकांक्षाओं के बारे में, आपके पास पड़ोस से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के बारे में.
और कुछ शब्द हमारी टीम की सराहना में भी खर्च करिए क्योंकि उन्हे और कुछ नहीं चाहिए सिवाय पहचान, प्यार और प्रसार के.
रविवार है, समयाभाव की स्थिति भी नहीं है, यहां अमेरिका में अभी रात्रि व्याप्त है मगर मैं जगा हूँ अपने पलामू की गूंज सुनने के लिए, माटी की महक सूंघने के लिए...
आपका
No photo description available.
2,851
People reached
401
Engagements
Boost Unavailable
You and 154 others
38 comments
3 shares
Like
Comment
Share

No comments:

Post a Comment