#ठेठ_पलामू - पेड़ा
अगर मिठाई की बात हो तो #पेड़ा की बात सबसे निराली है।बड़े शहर के महंगे रेस्टोरेंट हो या कस्बे का होटल या फिर गाँव-देहात के #गुमटी का होटल।यह खोआ और शक्कर के मिश्रण से तैयार स्वादिष्ट मिठाई होती है।पेशेवर हलवाई इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए नए-नए प्रयोग करते रहते हैं और हर जगह के पेड़े की अपनी अलग बात होती है।
पेड़ों का भी #गौरवशाली इतिहास है।यह शुद्ध रुप से भारतीय मिठाई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार इसका लगभग 175 साल पुराना इतिहास है।भारत में #मथुरा के पेड़े बहुत प्रसिद्ध है। अधिकांश लोगों का यह मानना है कि इसी ब्रजभूमि से यह मिठाई प्रचलन में आयी।फिर कर्नाटक के #धारवाड़ में यहीं के लोगों ने इस मिठाई को प्रसिद्ध करने का काम किया।
मथुरा के पेड़ों के साथ-साथ #बनारस और #देवधर के पेड़ों ने भी बहुत नाम कमाया है।आज तो ऐसी स्थिति है कि किसी भी शहर में एक न एक हॉटल का नाम जरुर होता है।जो अपने स्वादिष्ट पेड़ों के लिए मशहूर होता है।सामान्यतः शहर के पास किसी छोटे-गाँव या कस्बे मे उस क्षेत्र का सबसे मशहूर पेड़ा मिलता है।जहाँ पर गाय-भैस की अच्छी संख्या हो और पशुओं के लिए पर्याप्त रुप से हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है।
झारखण्ड में देवधर और #बीजुपाड़ा के पेड़ों का बहुत नाम है।हमारे डाल्टनगंज में #जमुने का पेड़ा बहुत प्रसिद्ध है। लहलहे में $महावीर साव के दुकान का पेड़ा भी अपने अनूठे स्वाद के लिए जाना जाता है। निश्चित रुप से आपके शहर या आपके आस पास भी बहुत सारे ऐसे हलवाई के दुकान होंगे।जो अपने स्वादिष्ट पेड़ों के लिए मशहूर होंगे।
© डॉ.अजय शुक्ल
चित्र(सौजन्य):- निराला विदेशिया

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