Saturday, January 2, 2021

गोतिया

एगो दोस्त के फोन करके पूछे कि "का हो तब कर रहा है बियाह कि नहीं" तो कहने लगा कि का कहे भाई अब घरे बियाह ला तैयार हैं। कहे हुए 2 साल हो गया है, लेकिन हमर गोतिया सब मरे जुकुर है, होने दे तब न करें। जब कहीं लगता है कि अब होगा तो झूठो में कुछ-न-कुछ कह के कटवा देता है। कभी कि लड़का पागल है, तो मिरगी के बीमारी है। कभी पहिले से बियाहल है तो कुछ कभी कुछ पता न का डाहजारी है सब के हमर बियाह से।
तो ये होते हैं #गोतिया इनका महिमामंडन में बस इतना कहा जाए तो समझिये कि हम आप जैसे लोग कोई भी इससे अछूते नहीं रहे हैं, तो आइए आज चर्चा करते हैं गोतिया पर।
दसरसल गोतिया मने एक ही पेड़ के अलग अलग शाखा कहिए। हर गाँव समाज मे कोई भी जाति धर्म का आदमी हो उसका खनदान में सबसे पहिले जो वहाँ आया। उसी के सब वंशज होते हैं और जैसे-जैसे वंश बढ़ते जाता है, घर बढ़ते जाता है, तो इस तरह से कहिए कि एक टाईटल वाला लोग रहते हैं। अब आता है इनका योगदान तो अगर हीरा में भी कमी बताना हो, तो कोई इनसे सीखे। अगर आपमें बुराई नहीं भी है, तो उसको ये डॉक्टर से पहिले खोज के निकाल देंगे। अगर आप पहाड़ भी गिरा के आइएगा न, तो कहेंगे अरे जा मुसकईल होतई, तबे गिर गलई। पर अपने अगर मूसा भी पकड़ लें, तो फिर देखिए बड़ाई। जैसे साक्षात फनिका पकड़ लिए हों।
जब किसी बात पर कोई कहता है न कि लोग क्या कहेंगे, असल में ये सब लोग जो हैं न यही लोग होते हैं। आप लाख बढ़िया इंतजाम खाना-पीना का शादी बियाह में कर लीजिए। दु चार गो अंगया बिजईया के नाम पर रूसबे करेंगे। सबसे बड़ा बात कि ऐसा भी नहीं कि नहीं आएँगे, आएँगे जरूर और खाएँगे भी पर खाते-खाते अपन साथे-साथे 2-4 गो आऊ आदमी के भड़काने का काम करेंगे। गलती से बियाह शादी में बारात चले गए और गलती क्या जाना तो है ही काहे कि नहीं जाएँगे, तो बुराई कैसे खोजेंगे बारात का। अगर आप उनके घर के बारात में गए तो व्यवस्था का बड़ाई करेंगे और अगर वही आपके घर उ आये तो फिर वही बात का शिक़ायत। उदाहरण के लिए अगर पेय पदार्थ में शर्बत चल जाए, तो कहेंगे ठंडा कोल्ड्रिंक्स नहीं है और अगर कोल्ड्रिंक्स चल जाए, तो कहेंगे ई सब फैशन के आईटम है,शर्बत का तो बात ही अलग है।
सबसे बड़ा रोल आता है इनका जमीन-जायदाद के बँटवारा में। एक-एक इंच के लिए जे लाठी निकलता है, इन्हीं का देन है। कोर्ट-कचहरी में ज़मीन ज़ायदाद का 100 में से 99 केस यही गोतिया वाला ही होता है कि फलना के हिस्सा ज्यादा मिल गया, तो हमको कम मिला। अब कोई गाँव-घर में रहता नहीं है, तो उसका खेत हथिया लिए ई सब कॉमन बात है। बाकि खेत के आरी काट के खेत बढ़ाने वाला, अापन जमीन कह के गोतिया के जमीन बेचने वाला ई सब काम तो हइये है।
कहीं-कहीं गोतिया लोग का संख्या कम है तो कहीं कहीं बहुत ज्यादा। अब सिंगरा पुरुबडीहा ई सब ऐसा जगह है, जहाँ साल भर कोई-कोई आते-जाते रहता है। सो बेचारा लोग मुश्किल से कोई पर्व-त्योहार में बिना छुतका के रह पाते हैं। आज के समय मे अगर कोई सफलता प्राप्त करता है, आगे नाम कमाने का कोशिश करता है तो उसका सबसे बड़ा कारण यही गोतिया ही होते हैं। जिनके कहने के चलते या जिनको दिखाने के लिए आदमी मेहनत करता है और जिन्दगी में सफल होता है। लाख बुराई भले हो पर सुख-दुःख के घड़ी में अगर सबसे पहले कोई आता है तो वह गोतिया ही होते हैं। इसलिए तमाम गोतिया लोगों को धन्यवाद आप इसी तरह से चर्चा करते रहे लोगों को कमी बताते रहिये और सफलता का झंडा गड़वाते रहिये।
कवि जी ने कहा भी हैं-
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।
इसी के आगे एक पंक्ति और जोड़ेंगे
भगवान बनाये गोतिया, पूरा गाँवे लिए बसाए।
आनंद केशव 'देहाती'
Image may contain: outdoor and nature, text that says "गोतिया ठेठ पलामू"
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