#ठेठ_पलामू: आज तीज है। विवाहित महिलाओं का सबसे बड़ा त्योहार। लोक परंपरा पर आधारित लोक आस्था का यह एक ऐसा व्रत है, जो अभी तक बाजारीकरण से बचा हुआ है।
इस पर्व को उतर भारत के अधिकांश राज्यों में महिलाएँ बहुत आस्थापूर्वक मनाती हैं। बहुत दिनों से इसकी तैयारी की जाती है। यह नई साड़ी,आभूषण और नई चूड़ियों के साथ सौंदर्य का त्योहार है।
यहाँ महिलाएँ अपने आराध्य महादेव की आराधना करती हैं, जो अपनी प्रिय पत्नी पार्वती से असीम प्रेम करते हैं।भारतवर्ष में अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए उपवास रुपी तपस्या की परंपरा रही है, इसीलिए वे भी अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए कठिन निर्जला उपवास करती हैं।
कुछ दिन पहले से ही इस पर्व की तैयारी शुरु हो जाती है। सबसे सुन्दर या नई साड़ी,आभूषण,चूड़ियों आदि का चयन कर लिया जाता है। हाथ में मेंहदी लगाना और पूजा के प्रसाद के लिए घर में स्वादिष्ट गुझिया बनाने की तैयारी शुरु हो जाती है।
यह कोविड -19 का समय है। विषम परिस्थितियाँ है। बहुत असुविधाओं के बावजूद भी इस पर्व को मनाने के लिए घर-परिवार की महिलाएँ उत्साहित हैं। समकालीन समय में इस पर्व के निर्जला उपवास पर विवाद भी होता रहा है। बहुत लोगों की तरह मेरा भी यही मानना है कि खा-पीकर भी त्योहार मनाया जा सकता है।
हमारी लोकपरंपराओं में पत्नी के लंबे उम्र के लिए पुरुष वर्ग के लिए उपवास या त्योहार मनाने के कोई दिन निर्धारित नहीं है। अगर ऐसा होता भी तो व्यक्तिगत रुप से मैं निर्जला उपवास जैसा कठिन व्रत नहीं कर पाता। वैसे भी किसी प्रकार के पर्व में मेरी विशेष रुचि सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजन और मिठाइयों में ही रहती है।
मैं जानता हूँ कि अधिकांश महिलाएँ मेरी बात से इत्तेफाक नहीं रखती है।कुछ रखती भी होंगी, लेकिन सामाजिक मर्यादा में इसका विरोध नहीं करती हैं। फिलहाल तीज पर्व करने वाली सभी महिलाओं को बहुत बधाई। उनकी त्याग,तपस्या और आस्था को बारम्बार प्रणाम।

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