Saturday, January 2, 2021

अटल जी और पलामू

श्रद्धांजलि अटल जी, पलामू से था आपका गहरा नाता
भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री #अटल_बिहारी_वाजपेयी जी की आज दूसरी पुण्यतिथि है। इनका नाम भारतीय राजनीति के उन चंद नेताओं की लिस्ट में शामिल हैं, जो हर शख्स के मनपसंद नेता हैं। अटल जी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी रहें हैं। अटल जी की याद में ही एक संस्मरण हमें प्राप्त हुआ है, जो पलामू से संबंधित है। यह संस्मरण पलामू निवासी और #अमर_उजाला, नोएडा में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार #प्रभात_मिश्रा_'सुमन' का है।
आज ही के दिन दो साल पहले अटल जी ने नश्वर शरीर का त्याग किया था। उनके वक्तृत्व कला के करोड़ों दीवानों में एक मैं भी था। इसी दीवानगी के कारण मैं अपने छोटे भाई गुड्डू के साथ उनसे मिल भी चुका हूँ। वे देश के प्रधानमंत्री तो रहे ही थे, देश के सुदूर इलाकों तक जा चुके थे। इनमें एक जगह मेरे गृह जिला पलामू का गारू (अभी लातेहार) भी है। पहली तस्वीर गारु की है, दूसरी में वे बेतला में हाथी की सवारी कर रहे हैं।
वनवासी कल्याण केंद्र के बाहर उनके साथ शिवनारायण पाठक जी और जगत जी हैं। दिसंबर 1981 में भाजपा के डाल्टनगंज में हुए प्रदेश सम्मेलन में भी वे आए थे। इस दौरान सम्मेलन स्थल पर हम दोनों भाई अपने फूफा और भाजपा नेता सुवंश पाठक जी के साथ थे। पहली बार अटल जी को नजदीक से देखने या यूँ कहें मिलने का मौका मिला। शाम को कोयल तट पर उनकी सभा हुई। कोयल तट की जब उन्होंने चौपाटी से तुलना की, तो बचपन से मानस पटल पर छाईं तालियों की आवाज आज भी गूँजने लगती है।
बेतला और हाथी पर सवार अटलजी
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अटलजी का पलामू से अटूट नाता रहा था। यहाँ आने के क्रम में वे बेतला भी गए थे। बेतला में हाथी की सवारी का अपना ही आनंद है। तो, भला इससे कैसे बच पाते अटलजी। अटलजी ने हाथी की सवारी की और जंगल में घूमे।
इसके बाद 1985 में दिल्ली में विद्यार्थी परिषद के अधिवेशन में उन्हें देखने और सुनने का मौका मिला। इसी सम्मेलन में उन्होंने विश्व युवा विद्यार्थी परिषद का शुभारंभ किया था।
कोयल तट पर बोले थे अटलजी, "ऊपर जय जयकार देखो और नीचे हाहाकार देखो।"
बिहार प्रदेश भाजपा का पहला सम्मेलन शाहपुर (उस वक्त मेरा गांव पनेरी बांध इसी पंचायत का हिस्सा था) में हुआ था। कोयल तट पर क्या शमां बांधी थी अटल जी ने। तर्कपूर्ण तथ्यों व तुकबंदियों से विपक्षियों पर धारधार शाब्दिक आक्रमण। एक तुकबंदी हल्की-सी याद है ! शेयर कर रहा हूँ....
•••• भला शासक दल भी कोई रैली करता है ?
लेकिन इन्हें क्या है ?
चलो दिल्ली
दिल्ली का दरबार देखो
लालकिले की दीवार देखो
चांदनी चौक की बहार देखो
कुतुब मीनार देखो
ऊपर जय-जयकार देखो
और
नीचे हाहाकार देखो।
श्रद्धांजलि अटल जी।
© प्रभात मिश्रा 'सुमन'




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