पलामू का नामकरण में '#पाला' शब्द का भी उल्लेख है। यहाँ पर रिकार्डतोड़ गर्मी के साथ कड़कड़ाती ठंड का प्रकोप भी झेलना पड़ता है। यह दिसम्बर महीने का अंतिम सप्ताह है, जब पलामू की ठंड अपने पूरे शवाब पर होती है।
पलामू के निवासियों में सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ लोग विकट से विकट परिस्थितियों में भी उतनी ही दृढ़ता के साथ खड़े रहते हैं। परिस्थितियों से संधर्ष करना और फिर विजयी होना हम सभी को खास बनाता है। चाहे कड़कड़ाती ठंड हो या फिर भीषण गर्मी, संघर्ष करना और फिर विजयी होना हमारी विशेषता रही है। यही कारण है कि भले ही हम देश-विदेश के किसी भी हिस्से में रहें। पलामू के निवासियों की एक अलग पहचान रहती है।
हाँ! तो इस मौसम में खुशियों के ढ़ेर सारे रंग भी हम सभी की स्मृतियों के साथ जुड़ी रहती है। ठंड के इस मौसम में #अलाव और उसके चारों तरफ बैठे हुए हम लोग सिर्फ अपना शरीर ही गर्म नहीं करते बल्कि इस अलाव के साथ हमारे पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में भी गर्माहट बरकरार रहती है।
इस अलाव के साथ कई कहानियाँ और कई प्रयोग जुड़े रहते हैं। इसकी तपन में सिर्फ सामाजिक आत्मीयता ही नहीं बल्कि लिट्टी, आलू,चना और मटर भी पकता है।उसके सोंधेपन की खुशबू और आत्मा तृप्त कर देने वाला जायका को कभी भूलाया नहीं जा सकता है। ठंड के साथ स्वाद भी जरूरी है। इस मौसम में #मकुनी हो,या आलू भरे पराठे या फिर घर के बने #पकौड़े हो। ठंड के मौसम म़े इसे खाने का अलग ही मजा होता है।
वैसे अब कुछ ही दिन बचे है। नए साल का स्वागत भी करना है। फिर मित्रों और परिवार के साथ पिकनिक की प्लानिंग भी करना है। ठंड के मौसम में हमारी आकांक्षाएं गर्म रहती है और हम सभी आश्वस्त रहते हैं कि अब अच्छा समय आने वाला है। जहाँ सभी दुख, परेशानी और बुरे दिन समाप्त होने वाले हैं। अब खुशी ,उमंग और उत्साह के साथ नया समय आने वाला है।जहाँ हमारे सपने सच होंगे। नयी-नयी स्मृतियों के साथ ढ़ेर सारी नयी खुशियाँ आएंगी। यही सोच हमें हमेशा की तरह आशावादी, संघर्षशील और सकारात्मक बनाती है।
©अजय शुक्ल

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