हमारे पेज का मुख्य उद्देश्य पलामू की मिट्टी से अपने लोगों को जोड़ना एवं यहाँ की संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर से अपने लोगों को अवगत कराना है।हमारे पेज पर प्रकाशित होने वाले आलेखों में हमारी पूर्ण कोशिश रहती है कि ठेठ पलामू में प्रकाशित रचना मौलिक और अप्रकाशित हो।यदि किसी कारणवश पहले से प्रकाशित कोई रचना पोस्ट की जाती भी है तो पहले उसके असल रचनाकार की अनुमति ली जाती है और उन्हीं के नाम के साथ ही कोई पोस्ट की जाती है।
हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि कतिपय लोगों के द्वारा किसी और की रचना को अपना बताकर हमें भेजा जाता है।जो कि सरासर गलत है।सीमित संसाधन होने के बावजूद हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम मौलिक एवं अप्रकाशित कृति ही प्रकाशित करें। किन्तु प्रत्येक आलेख के मौलिक एवं अप्रकाशित होने की पहचान करना बहुत मुश्किल कार्य है। अतः आप सभी सम्माननीय लेखकों से निवेदन है कि कृपया अपनी अप्रकाशित और स्वयं की रचना/आलेख ही पेज को भेजे। यदि पेज में प्रकाशित होने लायक किसी और की लिखी हुयी रचना को आप भेजते हैं तो उनके मूल रचनाकार की अनुमति लेकर और उनके नाम के साथ ही उक्त पोस्ट को भेजे।
अगर कोई व्यक्ति किसी और के आलेख को खुद का लिखा बताकर हमारे पेज पर प्रकाशित करने के लिए भेजता है और हमारी चूकवश वह रचना प्रकाशित हो जाती है तो कॉपीराइट एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा। यदि हमारे सम्माननीय पाठक हमें प्रमाण के साथ ऐसी जानकारी भेजेंगे तो हम क्षमायाचना के साथ उसे प्रकाशित करेंगे और इस प्रकार के अशोभनीय कार्य करने वाले फर्जी रचनाकार के नाम को भी उजागर करेंगे।धन्यवाद।
हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि कतिपय लोगों के द्वारा किसी और की रचना को अपना बताकर हमें भेजा जाता है।जो कि सरासर गलत है।सीमित संसाधन होने के बावजूद हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम मौलिक एवं अप्रकाशित कृति ही प्रकाशित करें। किन्तु प्रत्येक आलेख के मौलिक एवं अप्रकाशित होने की पहचान करना बहुत मुश्किल कार्य है। अतः आप सभी सम्माननीय लेखकों से निवेदन है कि कृपया अपनी अप्रकाशित और स्वयं की रचना/आलेख ही पेज को भेजे। यदि पेज में प्रकाशित होने लायक किसी और की लिखी हुयी रचना को आप भेजते हैं तो उनके मूल रचनाकार की अनुमति लेकर और उनके नाम के साथ ही उक्त पोस्ट को भेजे।
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17 Dec 2018, 19:20

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