Sunday, February 21, 2021

हथिया




बरसात का अंतिम नक्षत्र #हथिया, इस बार तो #हथिया पलामू से रुष्ट ही रही और किसान टकटकी लगाए आसमान की तरफ देखते रह गए। इस नक्षत्र में के बारे में कहा गया है कि-

"आवत आदर ना दियो, जात दीयो न हस्त,
इतने में दोनों गए पाहून और गृहस्त।"

किसानों की आखिरी उम्मीद हथिया होती है, इस पर बहुत कुछ निर्भर होता है, अगर हथिया में बारिश हुआ तो समझिए धान होगा अन्यथा सारे फ़सल बर्बाद होने से कोई रोक नहीं सकता। क्योंकि इस समय सारे धान का बाल फुट जाता है और उसे पानी की आवश्यकता ज्यादा रहती है। अगर इस समय पानी मिल गया तो धान बहुत अच्छा होता है पर अगर इस समय बारिश नही हुई तो फिर सारा मेहनत बेकार। किसानों के लिये उनके फसल को मरते देखना जैसे पिता के सामने उसके संतान की मृत्यु देखने जैसी होती है। धान की फसल ही नहीं रबी की फसल भी हथिया की बारिश पर टिकी होती है। अब इसका असर चना, तीसी, सरसों पर भी पड़ेगा। पलामू को फिर से #अकाल_क्षेत्र_घोषित करना पड़ेगा।

पहले हथिया आने के पहले ही गाँव घर में लकड़ी जमा कर लिया जाता था क्योंकि हथिया जब #झर लगाता था तब किसी का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता था। इसीलिए सभी जरूरत की सामग्री घर में जमा कर ली जाती थी.

हथिया के न बरसने का अर्थ है-
धान की लहलहाती फसल की #अकाल_मृत्यु

हथिया के न बरसने का अर्थ है-
कोठार और कुनबे का खाली पेट

हथिया के न बरसने का अर्थ है-

जीवन और जगत का अर्थहीन हो जाना ।

पलामू के अधिक्तर गाँव ऐसे ही है जहाँ सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, अर्थात वो पूर्णतः मानसून पर ही निर्भर है। और इसका दुष्परिणाम यह है कि लगभग विगत 10 वर्षों से 1-2 वर्षों को छोड़ दिया जाये तो हर वर्ष ही उपज अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई है। सरकारी हिसाब से देखें तो 10 साल से लगातार ही अकाल ग्रस्त जिला घोसित होता रहा है और उम्मीद है होता भी रहेगा।

© Sunny Shukla
12 Oct 2018, 08:12

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