Sunday, February 21, 2021

पलामू का अपना मेडिकल कॉलेज




‘पलामू मेडिकल कॉलेज’ का बनना इस क्षेत्र के विकास हेतु उठाया गया निर्णायक कदम है। पांकी रोड में डाल्टनगंज शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर पोखराहा खुर्द में आकर्षक ईमारत का निर्माण कार्य करीब चार साल पूर्व हुआ था। 2019 में प्रथम सत्र में यहाँ लगभग 80 विद्यार्थियों के नामांकन इस चिकित्सा महाविद्यालय में किया जा चूका है। डॉ. ज्योति रंजन प्रसाद को इस महाविद्यालय के प्रिन्सिपल का पद भार दिया गया, तथा विभिन्न विभागों के पचास के करीब अनुभवी प्रोफेसर भी यहाँ यहाँ नियुक्त किए गए हैं। हालाँकि मरीजों की देखभाल अभी जिला अस्पताल (सदर) में ही किया जा रहा है, मगर जल्दी ही मुख्य भवन में मरीजों की भर्ती और उपचार की व्यवस्था हो जाएगी। हालाँकि जितने तेज गति से इस महाविद्यालय का विकास होना था, वह शायद नहीं हो पाया, नतीजन मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने इस साल कॉलेज कि मान्यता रद्द कर दी है और इस साल यहाँ नामांकन नहीं हो पाया है। लेकिन उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी सक्रियता दिखायेगी और आने वाले सत्रों मे कमियों को पूरा कर लिया जायेगा।


शिक्षा के लिए पलायन पलामू के लिए दशकों से बड़ी समस्या रही है. चाहे तकनिकी शिक्षा हो या व्यावसायिक या फिर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी. आर्थिक बोझ के साथ-साथ पलायन के चलते पारिवारिक और सामाजिक परेशानियाँ भी बढ़ जाती थी. उदाहरण के लिए, रांची के किसी कॉलेज में पढने वाले विद्यार्थी जिनका घर कॉलेज से नजदीक हो वे हर छुट्टी में अपने घर आसानी से जा पाते थे, वहीँ दूर-दराज के विद्यार्थियों को कई बार सोचना पड़ता था, ऐसे में घर-परिवार, पर्व-त्यौहार या छुट गए गलियों की यादें उन्हें बहुत सताती थी. अब कम से कम मेडिकल में रूचि रखने वाले छात्र अपने घर के नजदीक मे ही अच्छी शिक्षा पा सकेंगे, छुट्टियों में घर आ सकेंगे और अपने त्योहारों और संस्कृति से जुड़े रहेंगे।

मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खुलने से पलामू की आम जनता को भी काफी सहूलियत मिली है। अब तक किसी भी इमरजेंसी केस जैसे- सांप काटना, सड़क दुर्घटना, डायरिया, लकवा, हार्ट अटैक इत्यादि में मरीज को लेकर रांची भागना पड़ता था. अक्सर अच्छी चिकित्सा ना मिलने के कारण रांची या दूर अस्पताल में ले जाने के क्रम में ही मरीज़ की मौत हो जाती थी. ऐसी स्थिति में पलामू मेडिकल कॉलेज वरदान और जीवनदायी सिद्ध होगा।

पलामू मेडिकल कॉलेज को शोर्ट फॉर्म में कहने पर “पी एम् सी एच” कहना पड़ता. अब पी मतलब पटना भी है और धनबाद स्थित पाटलिपुत्र भी. तो क्यों न इसका नाम बदलकर मेदिनिरॉय मेडिकल कॉलेज कर दिया जाये यानि “एम आर एम सी एच”. उम्मीद है पलामू के विकास में राजनीति आड़े ना आए और हमारा पलामू ऐसे ही निरंतर विकास करे। अगली कड़ी में बात पलामू के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज की. जुड़े रहिये #ठेठ_पलामू से.
@ Balendu Shekhar
1 Feb 2021, 18:04

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