भारतवर्ष में #गणतंत्र_दिवस के ध्वजारोहण के पश्चात मिलने वाली सबसे पसंदीदा मिठाई तो "#जलेबी" ही है। वैसे तो स्कूलों में अब भी #बुंदिया_मिक्चर, #लेमचूस या लड्डू देकर बच्चों को फुसला दिया जाता है, लेकिन बच्चे हो या बड़े, जलेबी सभी को बहुत प्रिय है। जलेबी के बिना खुशी का क्षण कुछ-कुछ अधूरा सा लगता है। और जब मौका 26 जनवरी का हो तो राष्ट्रप्रेम के साथ इस टेढ़ी-मेढ़ी मिठाई का लुफ्त उठाने का अपना अलग ही मजा है। दूसरी मिठाईयों के मुकाबले यह सस्ती होने के साथ-साथ सर्वसुलभ भी है। और जनवरी के महीने में सुबह की ठंड और उसके बाद गर्म, कुरकुरे और चाशनी में डूबी हुई रस्सेदार जलेबी का स्वाद, इस खुशी को दोगुना बढ़ा देती है।
जलेबी को भारतीय मिठाई बताने वाले इसका प्राचीन भारतीय नाम #कुंडलिका बताते हैं। कुछ इसे #जल_वल्लिका भी कहते हैं जबकि संस्कृत भाषा में इसे #सुधा_कुंडलिका नाम दिया गया है। अगर इसके इतिहास की बात की जाए तो इसे विशुद्ध भारतीय मिठाई मानने वालों को थोड़ी तकलीफ हो सकती है। क्योंकि इतिहासकारों के मुताबिक जलेबी तकरीबन 500 साल पहले मुस्लिम शासकों और व्यापारियों के जरिए भारतवर्ष में आयी थी। कुछ विद्वान इसे अफगानिस्तान से तो कुछ तुर्किस्तान से जोड़कर देखते हैं।
ऐसी मान्यता है कि जलेबी का असल नाम #ज़लाबिया है और यह अरबी भाषा का शब्द है। तुर्की वाले इसे ज़ुलुबिया कहते हैं। विश्व के अधिकांश देश में यह विभिन्न नाम से जाना जाता है। उत्तर भारत और पाकिस्तान में इसे जलेबी कहते हैं। नेपाल में जेरी, महाराष्ट्र में जिलबी तो बंगाल में यह जिलपी से नाम से जाना जाता है।
13वीं सदी में तुर्की के मोहम्मद बिन हसन बगदादी की पुस्तक "किताब-उल-तबिख" में ज़लाबिया के नाम से जलेबी का जिक्र मिलता है तो 1450 ई. में जैनधर्म की पुस्तक "प्रियम कर्णप कथा" में जलेबी का उल्लेख भगवान को भोग लगाने वाली सामग्री के रुप में होता है।रघुनाथ कृत "भोज कुतूहल" नामक ग्रंथ में भी जलेबी जैसे व्यंजन बनाने की विधि का उल्लेख है।
आज जलेबी भारत की सबसे लोकप्रिय मिठाई है।फिल्मों में, टीवी में और विज्ञापनों में इस मिठाई का जिक्र होते ही मुंह में पानी आ जाता है। शायद "धारा रिफाइन" के उस विज्ञापन की यादें आपको भी ललचाती होगी जिसमें एक छोटा बच्चा जब रुठकर रेलवे स्टेशन पर बैठा होता है, तब उसके दादाजी बताते हैं कि- "मम्मी ने आज जलेबी बनाई है। यह सुनते ही उसका गुस्सा छूमंतर हो जाता है।"जलेबी बाई" वाला लोकप्रिय फिल्मी गीत भी आपको याद ही होगा। जलेबी की लोकप्रियता से जुड़ी और भी ढ़ेर सारी बातें हैं लेकिन ज्यादा बड़ा पोस्ट बहुत लोग पढ़ते नहीं, इसीलिए अब मुख्य मुद्दे पर आते हैं।
वैसे तो आज आपने भी जलेबी खायी ही होगी और गणतंत्र दिवस की खुशियां भी मनाई होगी। आज यह सब बताने का एकमात्र उद्देश्य यही है आज गणतंत्र दिवस है। और घुमावदार संरचना के बावजूद जलेबी के अपने अनुशासन हैं जैसे कि मिठास कितनी, आंच कितनी, खमीर कितना और उबाल कितना. तब जाकर टेढ़े मेढ़े खाद्य पदार्थ से 'वाह' वाले स्वाद टपकते हैं. इशारा समझ गए होंगे गणतंत्र से इसके संबंध को लेकर। आज मुँह मीठा करने का दिन है। आज जलेबी खाने का प्लान बनाइए। खुद खाइए, अपने मित्रों, परिजनों और छोटे बच्चों को खिलाइए और उन्हें खुश कर दीजिए। उनके चेहरे की चमक देखकर आपकी खुशी दोगुनी हो जाएगी।
आप सभी को #ठेठ_पलामू की ओर से गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
© अजय शुक्ला
26 Jan 2021, 08:59

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