Sunday, February 21, 2021

बड़े घर की बहू


नाम रजनी,कोई शर्मा, वर्मा, दुबे, सिंह, साहू, तिवारी, शुक्ला नहीं। इनके जुड़ने से विशेष वर्ग नाराज़ हो सकता है। उम्र सत्ताईस वर्ष, गोल्ड मेडलिस्ट, फिजिक्स टीचर ,गौरवर्ण, शालीन, हँसमुख बड़ी मेहनती और बच्चों की चहेती। स्कूल के मिड टर्म एग्जाम शुरू होने वाले हैं। एक शार्ट मीटिंग खास निर्देश के लिये बुलाई गई थी। कल तीज का व्रत है। मैं अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर व्रती महिलाओं को जल्दी भेज देती हूँ। आज नहाय खाय था। धुले रूखे बालों में सिन्दूर सजाए, लाल हरी चूड़ियां पहने, माथे पर दपदपाती बिंदी लगाये महिलायें जंच रही थीं। आवश्यक निर्देश के बाद सभी टीचर्स जाने लगे।मुझे लगा कि रजनी का चेहरा उतरा सा है। मैंने उसे कहा रजनी फ्री पीरियड में आना, कुछ काम है। जी मैडम,थैंक्यू बोल चली गई।

रजनी इसी शहर के सम्मानित परिवार की पुत्रवधू है। पति इंजीनियरिंग की डिग्री रखता है किंतु पिता के खानदानी #ठेकेदारी से ही जुड़ा है। क्योंकि किसी के नीचे रहकर काम करना इनके पारिवारिक शान के खिलाफ था। लगभग डेढ़ घंटे बाद वो मेरे ऑफिस में आई। मैं चेयर छोड़ सोफे पर बैठी और उसे पास बैठाया।उसका हाथ स्नेहवश हथेली में लिया।अरे! तुम तो ज्वर से तप रही हों। दवा ली है या नहीं ? उसने कोई जवाब नहीं दिया। बस आँखे छलक गईं। कुछ तो गड़बड़ है ..मेरे मन ने कहा। रजनी बात क्या है? निःसंकोच कहो। क्या कहूँ मैडम...बताने में भी शर्म आती है। रजनी , तुम्हारे निजी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, किन्तु यदि मानवता के नाते कुछ किया जा सकता है तो बोलो। तभी उसने झुका सिर उठाया--"काँपती आवाज़ में बोली, ...मेरी कोई निजी जिंदगी नहीं है मैडम....पूरा घर जानता है कि मेरे साथ क्या होता है....मैं तो अपने बीमार पिता को भी नहीं बता सकती....जिस क्षण वो मेरी सच्चाई जान जायेगे उसी पल उनकी सांसे थम जाएंगी।
थरथराती हुई रजनी ने साड़ी का पल्लू हटाया, कमर, पीठ गले पर नील पड़े हुए थे। ये क्या? रजनी किसने? क्यों किया? उसने कहा---सच मेरे जीवन का, जो मैं किसी को बता नहीं सकती, दिखा नहीं सकती। बेल्ट से पीटा है उसने मुझे। फूट पड़ी...मैं पिछले चार दिनों से बीमार हूँ। गई रात वो लौटते है। वैसे तो #दारू-मुर्गा और #नाच के चलते अक़्सर रात-रात भर बाहर ही रहते हैं। पर किस रात आ जायें पता नहीं रहता। सारा घर सोता है ,मैं इंतजार में जागती हूँ क्योंकि घर के लाडले ठंढे फुल्के खाना नापसंद करते हैं। मेरी जिठानी ने सासु माँ को कई बार उलाहना दिया है,देवर जी की आदत ठीक नहीं। माँ कहती हैं---"इहे त् खेले खाय के उमर बा ,तू चुप रह, आपन जिनगी देख "

मैडम ,कल रात अचानक #औरंगाबाद से कोई #नाच देख कर नशे में धुत घर आया, वही फ़ूहड़ गाने गुनगुनाते हुए, शायद उसके दिमाग़ में वही नाचने वाली सवार थी। उसके पेट की भूख तो शांत कर दी मैंने, शरीर की न कर पाई.... बौखला गया,..बेल्ट से रुई की तरह धुन डाला। मेरी पिटायी देखकर अभी भी 3 साल की बेटी डरी हुई है। आज तो तन से ज्यादा गहरे घाव मन पे हुए हैं। बड़े घर की बहुएं मुँह नहीं खोल सकती। सासु माँ कभी-कभी अपने हाथों में ज़ख्म के निशान दिखाते हुए कहती हैं -" ई तो पूरा अपन बाप पर गइल हव , लेकिन का करब अब बढ़ घर के पूतोह बने में एतना तो सहहीं पड़ेला।" इतना कहते अपने एक दिन के अवकाश की अर्जी सामने रख दी।

तीज के अगले दिन भी वो नहीं आई।करीब दस बजे मैंने फोन किया। उधर से शिथिल स्वर में बोली "सॉरी मैडम, नहीं आ सकी। कल उपवास किया था, बहुत कमज़ोरी हो गई है। #स्लाइन चढ़ रहा है। घबरा के मैंने पूछा ---तुम्हारा पति कहाँ है? फीकी हंसी के साथ बोली, धीरे से -""वो तो तीज वाले दिन ही #शक्तिपुंज से कलकत्ता चले गए,अपने प्रिय स्थल "#सोनागाछी"। मेरा शरीर सुन्न सा हो गया उधर फ़ोन भी डिसकनेक्ट हो चुका था ।

©Renu Sharma
29 Oct 2018, 08:17

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