Sunday, February 21, 2021

आकाशवाणी पलामू




6 सितंबर 1993 को मेदिनीनगर की धरती पर आकाश से एक वाणी सुनाई पड़ी थी "आकाशवाणी "!

किसी को अपने कानों पर यकीन नही हो रहा था कि जंगलों, पहाड़ों से आच्छादित पलाश, लाह और महुआ की धरती पलामू में कुछ ऐसा चमत्कार हुआ है!

किसी चीज की असली कीमत तब हमें समझ में आती है जब उसके पीछे हम काफी परेशानी झेले होते हैं। पहले रेडियो पर शार्ट और मीडियम वेव पर आवाज साफ सुनाई नही पड़ती थी, तो लोग झुंझलाहट मे रेडियो पटक तक दिया करते थे और उसे हमेशा झकझोरते भी थे। ऐसी स्थिति में जब आकाशवाणी डाल्टनगंज में एफएम की शुरुआत हुई तो यहां के लोगों के (रेडियो प्रेमियों के )सपनों को मानो उड़ान मिल गई। फिर तो वे पंख लगाकर उड़ने लगे आकाश में आकाशवाणी के संग। क्योंकि अब जो आवाज रेडियो सेट से आ रही थी वो बिल्कुल स्पष्ट और धमाकेदार थी। लगता था मानो प्रस्तुतकर्ता हमारे सामने बैठकर बोल रहे हों। फिर क्या था फिर तो सिलसिला सा चल पड़ा साइकिल पर एफएम रेडियो, पंक्चर की दुकान, पान गुमटी, कार, खेत-खलिहान रसोई यहां तक की भैंस पर बैठकर भी रेडियो सुनने का सिलसिला शुरू हो गया। क्योंकि रेडियो श्रोता का पढा लिखा होना भी जरूरी नहीं। अखबार से समाचार जानने के लिए पढाई की जरूरत है, पर रेडियो से समाचार तो अनपढ या अंधे व्यक्ति भी सुन सकते हैं। रेडियो ने सरहदों की सीमाएं भी नहीं मानी। जंगलों पहाड़ों, नदियों से होकर भी इसकी आवाजें छनती रहीं और लोग भावविभोर होते रहे कजरी, सोहर, राखी गीत, विवाह गीत, देवी गीत क्या कुछ सुनने को नही मिलता गंवई श्रोताओं का अपनी ही माटी की खुश्बू अपनी ही भाटी से। लगता है जैसे हमारे बीच का कोई रेडियो से हमारा मनोरंजन कर रहा और यही तो सच भी है!जिन्हें भी मीडिया से जुड़ने का शौक था और हिंदी पर अच्छी पकड़ थी वे बतौर उदघोषक /उदघोषिका /एंकर आपका मनोरंजन करने को एक कठिन स्वर परीक्षा का सामना करके आ गए आपके द्वार। अब तो आपकी सुबह ,शाम और रात इनकी आवाज के साथ ही होती है। रेडियो से जूड़े ये सारे लोग घर घर में नाम से लोकप्रिय हैं।

किसानो को मिला 'किसानवाणी" कार्यक्रम, जिसमें कृषि संबंधी सारी उत्सुकता का हल, तो युवाओं को मिला 'युववाणी' साहित्य प्रेमियों को मिला "खुला आकाश ",खेल प्रेमियो को "खेल गतिविधि" महिलाओं को 'घर आंगन' तो बच्चों की 'बालसभा' और गानों के शौकीन लोगों को 'गीत गुंजन' गाने तराने, बाइस्कोप, चित्रपट से ,आपकी पसंद, एक रंग और रजनीगंधा जैसे बेमिसाल कार्यक्रम। स्वास्थ्य संबंधी सारी परेशानियों का हल घर बैठे मिला 'स्वास्थ्य चर्चा "और 'कल्याणी' कार्यक्रम के तहत ।सबकुछ तो मिल ही जाता है एक ही जगह एक ही सेट पर । बस टयून करना होता एफएम 103 मेगाहर्ट्ज पर आकाशवाणी का डाल्टनगंज केंद्र।

6 सितंबर 2018 दिन गुरुवार को मनाया आकाशवाणी डाल्टनगंज ने अपना ऐतिहासिक रजत जयंती। इस रजत जयंती के उपलक्ष्य में आप भी अपनी आकाशवाणी से जूड़ी यादों को साझा किजिये।

© Sharmila Shumee

-शर्मिला 'शुमि',उदघोषिका आकाशवाणी डाल्टनगंज
8 Sep 2018, 07:34

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