Sunday, February 21, 2021

मॉर्निंग वॉक


जब से हमर हमउम्र छोटका मामा के नौकरी #सीआरपीएफ में होइल तब से हमर माई भोरे-भोरे हमरा उठा के #जीएलए_कॉलेज ग्राउंड में दौड़ेला खदेड़े लागल। अब माई के त नौकरी से मतलब, कईसनो होखे के चाही। माई के ताना के मारे हमहूँ ठान लेली कि अबरी तो दउड़ निकालिए लेवे के बा। लेकिन अपन गोड़ में केतना ताकत रहे ऐकर थाह तो दउड़ला के बाद पता चलल न। शुरू-शुरू तो एक्के राउंड मारे में हमरा नानी आजी सब याद आ गइलन। पूरा एक महीना लागल कॉलेज ग्राउंड में एक राउंड पुरावे में अउर शरीर तो सुख के कांट हो गइल।

माई चाहे कइसनो रहे अपन बेटा के सुखल ना देख सक ला। जब ओकर मुँह से सुन लेली कि "बेटा तू रहे दे, सिपाही के नौकरी तोहार जइसन #सुकवार से नइ हो पारी। घरे बईठ के खाली रोटी तोड़ और मऊगई कर।" तब जाके हमर जान बच पाईल। लेकिन भोरे उठे वालन के भी ना एगो बीमारी हो जाला। भोरे-भोरे ना उनकर दिमगिया में अलार्म बजे लाग ला। हमरो उ बेमारी लाग गइल। अब भोरे उठ के का करूँ? त अगल-बगल के देखा-देखी हमहूँ सोचली कि #मॉर्निंग_वॉक करल जाव।

इ उ समय के बात बात बा, जब #डाल्टनगंज में मॉर्निंग वाक के नयका हवा-बयार शुरू भइल रहे।लइका-जवान, मरद-मेहरारु सबके रैला देखके मन हरियर हो गइल कि वाह हमर डाल्टनगंज के लोग आपन स्वास्थ्य के लेकर केतना सचेत बाड़न। दू-चार दिन तो अकेले जाए के पड़ल। अब धीरे-धीरे मोहल्ला के बड़-बुजुर्ग सब संगी-साथी बन गइलन। लेकिन कहानी के असली मज़ा ता अब आवे वाला बा। भिनसारे इ सब बूढ़वन त बड़ी रंगीन-रंगीन बात कर हलन। ग्रेचुइटी से बात शुरू होइतक और हमेशा कउनो के मेहरारू पर ख़तम होइतक।एगो के घरे चाची तनी टाईट हलन ता उ चचा ओहिए सिगरेट फूँक हलन। का बताऊं खूब बतकही होव हलक।

लेकिन एगो चीज त पक्का रहे कि अधिकतर के पुतोहियन एक नंबर के आलसी रहन, अउर बेटा तो सबके सब नालायक। उनकर बेटा बहुरिया से बात शुरू होइतक अउर पहुँच जइतक राँची, पटना, दिल्ली होते हुए रुस, जापान, चीन अउर अमरीका तक। बर-बेमारी,शादी-बियाह अउर परिवार के खींचतान के बाद भी उ सब के याद रह जा हलक भारत के परमाणु संधि से लेके, नेहरू-पटेल-इंदिरा सब। दुनिया के कउनो टॉपिक पे डिस्कस कर सक हलन सब। एक बार तो एरोप्लेन के टायर पंचर होइला पे स्टेपनी रख ले कि ना, इहे पे पाँच किलोमीटर रगेद देलन सब।

कभी-कभी माहौल गमगीन भी हो जा हलक, जब कोई संगी के भगवान बुला लेव हलन। फिर कुछ दिन बाद ओइसहीं फिर सबके जिंदादिली वापस आजा हलक। मेंबर्स लोगन के आन जान लगल रहs हलक। मॉर्निंग वाक के फैशन के उफान में बड़-बुजुर्ग ही नाहीं बल्कि जवनका लइका-लइकी, मरद-मेहरारु सब भिड़ल रहले। लइका-लइकी त मोबाइल लेके अउर कान में ठेपी लगाके का मालूम कउन दोसर दुनिया में रहले। रोड पर घुमे फिरे अउर फिटनेस के बहाना के नाम पर उनकर घुमाइ त बाटसेप अउर फेसबुक पर ही होखत रहे।

अउर पलामू के #मेहरारु भी केकरो से कम नाहीं। अड़ोसी-पड़ोसी में केकर लइका, केकर लइकी बिगड़ गइल बा। केकर बियाह नइखे होवत। केकर बहुरिया का करत बा। एतना कचराही बात कि चलत-चलत कब सुदना से सिंगरा तक पहुँच जाला कि पते नाहीं चलला।

एकर अलावा भी डाल्टनगंज के मॉर्निंग वॉक के बहुत कहानी बा।एक से बढ़कर एक घूमे वाला मजेदार पात्र बाड़ेन अउन उनकर बढ़िया-बढ़िया कहानी भी। इ मॉर्निंग वाक त अब हमेशा चालू रहे वाला बा। बस रउआ लोग भी आपन अनुभव बताऊँ त अउर मजा आई।

©Sunny Shukla
9 Dec 2018, 11:46

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