Sunday, February 21, 2021

खरमास





जब घर में कुछ काम के बात निकलता कि ये करना है वो नया काम करना है तो पता नहीं कहाँ से एके गो लाईन सुनने के लिए मिलता है- "अभी खरवान्स न हई, ना न करे बनतई।"

अब हद है भाई ई कवन नाम है कि बस हर बढ़िया काम शुरू करने से पहिले ई बीच में आ जाता है। गाड़ी खरीदना हो, घर बनाना शुरू करना हो या दुकान खोलना हो हर काम में दिक्कत। आऊ तो आऊ कउनो के नया नया बियाह हुआ है आउर अपन #मेहरारू के #लिवथर लेने जाना है तबो दिक्कत और फिर से वही लाईन कि "खरवास न हई अभी नयकी कन्या के लाने ना न बनतई , एतना दिन बाद लनिहे।"

अब घरे के बढ़ बुजुर्ग कुछ कहते हैं तो अइसहीं तो कहते नहीं, जरूर उसके पीछे कुछ-न-कुछ कारण रहता है। तो दिमाग में बात दौड़ रहा था, पूछ ताछ किए तो पता चला साल में दु बार ई परेशान करता है। एक बार होली के बाद #चइत मेंआउ एक बार दिसम्बर, जनवरी (पूस) महिना में। एक बार सक्रांति के ख़त्म होता है तो एक बार विसो के दिन। संक्रांति के समय तो पूरा विशेष रूप #तिलकूट गुड़ चुड़ा खा के इनको विदा किया जाता है पर दूसरा बार #विसो समय गर्मी का ख्याल रखते हुए सतुआ खिया के इसको अरियात दिया जाता है।

खरमास नाम के पीछे एक पौराणिक #किंवदंती है। खर गधे को कहा जाता है। #मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ में बैठकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं और इस दौरान उनको कहीं भी रुकने की इजाजत नहीं होती। लेकिन सूर्य के घोड़े साल भर दौड़ने के बाद प्यास से तड़पने लगे, इसलिए वह उन्हें पानी पिलाने के लिए एक तालाब के किनारे रुक गए। पर तभी उन्हें यह एहसास हुआ कि यदि रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा। तालाब के किनारे उन्हें दो गधे खड़े दिखाई दिए, वे उन्हें ही रथ में जोतकर चल दिए और इस प्रकार एक मास तक धीरे-धीरे चलते रहे। इस तरह घोड़ों को भी आराम मिल जाता है और यह क्रम चलता रहता है।

भगवान सूर्य संपूर्ण ज्योतिष शास्त्र के अधिपति हैं। सूर्य का मेष आदि 12 राशियों पर जब संक्रमण (संचार) होता है, तब संवत्सर बनता है, जो एक वर्ष कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्ष में दो बार जब सूर्य, गुरु की राशि धनु व मीन में होता है, उस समय को खर, मल व पुरुषोत्तम मास कहते हैं। जैसे इस बार सूर्य गुरु की राशि मीन में है। सूर्य का गुरु के राशि मे आ जाने गुरु का प्रभाव कम पड़ जाता है। और किसी भी शुभ कार्य के लिए गुरु का प्रभाव में होना आवश्यक माना गया है। जिसके चलते इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इस बार खर मास का प्रारंभ 15 मार्च से हो गया है, जो 14 अप्रैल, 2019 को समाप्त होगा। इस मास की #मलमास की दृष्टि से जितनी निंदा है, #पुरुषोत्तम मास की दृष्टि से उससे कहीं श्रेष्ठ महिमा भी है। भगवान पुरुषोत्तम ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा तथा मेरी सादृश्यता को प्राप्त करके यह मास अन्य सब मासों का अधिपति होगा।

खरवान्स ख़त्म होते लगन शुरू हो जाएगा। तो अबकी विसो में #सतुआ खा के इसको खत्म करिये। सुने है सतुआ खाने से पाचन शक्ति मजबूत रहता है , तब न लगन में पूड़ी बुनिया भरपूर चलता है।

Anand Keshaw
5 Apr 2019, 03:57

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