महिलाओं का जीवन इतना आसान नही होता और पुराने समय की बात की जाए, तो बहुत मुश्किलें थीं। जांता, मिट्टी का चूल्हा, ढ़ेकी, ओखल, सिलबट्टा और पहंसुल उनके जीवन के अभिन्न अंग थे, जिनके माध्यम से वो घर के दैनिक कार्य निपटाया करती थीं। पर जैसे-जैसे हम आधुनिक होते गए, वैसे-वैसे इन चीजों से किनारा करते गए और महिलाओं के जीवन में तो आधुनिक उपकरणों ने गज़ब की क्रांति ला दी। लाए भी क्यों नहीं, अब की महिलाओं का जीवन सिर्फ चूल्हे चौके तक ही सीमित भी तो नहीं है, वो कामकाजी भी हैं। इसलिए दोहरी जिम्मेदारी निभाने के लिए फटाफट काम निबटाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल समय की मांग भी है और काफी सुविधाजनक भी। जांता, ढ़ेकी, सिलबट्टे आदि इस्तेमाल करने वाली महिलाएँ बिना किसी व्यायाम के या जिम गए भी सुडौल और स्वस्थ्य रहा करती थीं। पर वक्त बदला और साथ ही बदल गयीं तमाम चीजें।
पहले हर घर में 'पहंसुल' का ही इस्तेमाल सब्जी काटने के लिए हुआ करता था, पर अब तो उसकी जगह तरह-तरह के सब्जी कट्टर और मशीनों ने ले ली है। जिससे निश्चित ही हमारा जीवन आसान बना है। शहर ही नहीं, अब गाँव में भी महिलाएँ इन आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं। पर इन आधुनिक उपकरणों ने महिलाओं को काफी आरामतलब भी बना दिया है, जिससे सिर्फ फिगर ही नहीं स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है । 'पहंसुल' का इस्तेमाल करने के लिए #मचिए पर या #चुकुमुकु बैठना पड़ता था, जिससे पेट निकलने की संभावना कम होती थी और घुटने भी स्वस्थ रहते थे। पर अब चाकू से सब्जियाँ काटकर खड़े-खड़े गैस पर खाना बनाने वाली महिलाएँ कई बीमारियों को दावत दे रही हैं ।
याद हैं, बचपन के वो दिन जब माँ, चाची, मौसी लोग चने की साग, बथुआ, गोल कद्दू पहंसुल से बैठकर काटा करती थीं और जब कभी जंग लग जाए, पहंसुल पर तो पत्थर पर रगड़कर खुद ही पजा भी लिया करतीं थीं।
आज की महिलाएँ कितना भी आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर लें। साग-सब्जी काटने के लिए पर जब घर में चने की साग, कोहंड़ा, गोलका कद्दू और कटहल आता है तो नानी याद आ जाती है और तब पहंसुल जरूर याद आता है,नक्योंकि जितनी आसानी से पहंसुल से इन साग-सब्जियों को काटा जा सकता है, उतनी आसानी से चाकू-छुरी से नहीं। इतना ही नहीं, आम का अचार बनाते समय भी पहंसुल याद आता है, जिससे आसानी से आम कट जाया करते थे और घर का बड़का पहंसुल हमेशा किसी-न-किसी के घर जाता रहता था। #ठेठ_पलामू के इस शानदार पेज से वैसी महिलाओं से जरूर आग्रह करूँगी, जो अभी भी सिर्फ घर में रहती हैं, आप जरूर अपनी परंपराओं को संजोएँ और सुडौल एवं स्वस्थ बनीं रहें ।
©शर्मिला शुमि
आकाशवाणी उदघोषिका, समाजसेविका, मेदिनीनगर
नीचे कमेन्ट मे एक शोध पत्र का लिंक दिया गया है कि कैसे पहंसुल के इस्तेमाल से महिलाओं में जोड़ों की बीमारियों मे फायदा होता है.
13 Jan 2021, 08:05

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