Sunday, February 21, 2021

लातेहार के दोस्त




हिन्दी दिवस तो बीत गइल, लेकिन एगो बात कहेला बाकि रह गइल। हिन्दी में बात करेला तो हम मैट्रिक के बाद ही सीखली। ओकरा से पहले तो मगही ही हमर भाषा रहे। ओइसे पढ़ेला तो हम हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू आऊ फारसी भी पढ़ले हली, लेकिन बोले खाली मगहिये आवे हलक।
गजब तो इहु हलन कि हमार गुरूजी गणित, विज्ञान आऊ अंग्रेजी भी तब मगहीये में पढ़ा देवे हलन। आऊ तो आऊ इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर में #ठाकुर सर से पढ़ले रहली, उ तो #कैलकुलस, #कोआर्डिनेट आऊ #अल्जेबरा तक मगहीये में पढ़ा देवत रहन। उ समय अगर कोई हिंदी/उर्दू में बात कर हलक तो सब ओकरा बड़ी पढ़ल-लिखल समझे हलन। आऊ जो थोड़ा सा भी अंग्रेजी जाने हलक उहे तनी-मनी अंग्रेजिये में बात करे हलक।आऊ ओकर इज्जत तो गाँव-घर में पूछा मत।


जब पहली बार घरे से राँची गईली तो हिंदी सही से बोले न आवे हलक। ट्यूशन में भी कोई से बात करती तो लइकन लोग जवाब देवे से पहिले सवाल ही कर देवत रहे कि , "पलामू से हो क्या ?"
लगभग 3 महीना तक तो कोशिश कईली के अच्छा से हिंदी बोले ला सिख जाऊँ,
लेकिन कोई फायदा न दिखल! फिर दिमाग में एगो बात आइल की खाली पलामू के लइकन से बात करब, काहे की इनलोग तो ना न पुछिहन के "पलामू से हो क्या ?"
आऊ एही करेला शुरू कैली!
अगला कुछ दिन में जो भी दोस्त बनलन सब पलामू के रहन! आऊ राँची में हमरा ला पलामू कोई जिला के नाम नाहीं हमर धरम के नाम रहे!
काहे से की ऊहाँ कोई भी लइका मिले हलक तो हमर पहला सवाल एही होवे हलक के "कहाँ से हो भाई ?"
आऊ जइसहीं अगला के मुँह से पलामू सुनती तो अईसन लागत के बिछड़ल भाई मिल गईल! चाहे उ केहू धर्म/जात के होवे! आऊ ओकर बाद तो ओकरा से जेतना बात करती सब मगही में!

एक बार रूम में राँची जिला के एगो लइका रहे आइल! अगले दिन से ओकर 4 गो यार रोज-रोज आके हल्ला-गुल्ला करे लगलन! दू-चार दिन तो मटियौली! ओकर बाद मना कईली तो उलटी हमरे बोले लगलन के "पलामू से आके यहाँ रँगदारी न करो, न तो बहुत बुरा होगा"। उ समय तो हमर दिमागे काम करे ला बन्द कर देलक, काहे से कि हम कभी कोई से लड़ले झगडले न हली! फिर बगल के रूम में गइली, उ में सब लातेहार के लइकन रहे हलन, उहनी से बतैली के भाई अइसन बात है! उलोग तुरन्त बोल्लन "चल तो रूम में कौन रँगदार आइल बा हमहुँ देखीं!" जइसहीं रूम में अइली तो उहनीन से लातेहार वाला जो लइका रहे उ पुछलक के "कौन मारे ला बोल रहा है रे, कौन रँगदार बन रहा है"। एतना सुनते चारों चुप-चाप उठलन आऊ चल गइलन! ओह दिन अइसन लागल के एगो आउ भाई मिल गइल! #लातेहार_वाला_भाई!
ओह दिन के बाद उहनीन आवे भी तो जब तक हम रूम में रहीं सब एकदम शांत बैठल रहे, हमरा रूम से निकलला के बाद ही हल्ला गुल्ला करतन।
आऊ रूम में भी सब लातेहार के रहन, हमहीं अकेले रहनीं ऊहाँ पलामू के! लेकिन उलोग हमरा साथे कभी कोई भेदभाव न करलन! साथे खाना-पीना, सबलोग रूम में मगहिये बोलत रहलीं, तो अइसन लागे लागल के अपना गाँव में ही, अपना घर में ही! आउ ओह दिन से आज तक मगही बोले में कभी शरम न महसूस होईल! आऊ आज भी हमरा मगहीये बोले में अच्छा लागेला!

भले आज पुरनका पलामू जिला तीन भाग में गढ़वा, पलामू, लातेहार में बँट गइल बा, लेकिन हमीन के भाषा ही बा जे सबके आज तक सब के जोड़ के रखले बा। आउर सबके जरूरी बा कि अइसही जुड़ल रहथ।
#थैंक्स_पलामू
#थैंक्स_मगही
#थैंक्स_लातेहार
❤❤❤

©️ Sawud Alam
6 Oct 2018, 05:19

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