Sunday, February 21, 2021

धुसका






अगर पलामू के खान-पान की बात की जाए तो यहाँ की बोली के जैसा ई भी मिक्स है। अब जैसे भाषा में भोजपुरी मगही का मिलावट है, एकदम ओइसे ही खान-पान में भी बिहार और नागपुरी (छोटा नागपुर) का पूरा असर साफ दिखता है। तभी तो सत्तु भरल कचौड़ी और छानल #लिट्टी के अलावा राँची का स्ट्रीट फूड #धुसका आपको पलामू में भी हर जगह सुबह-सुबह मिल जाएगा। वैसे तो पोलपोल के चंदू साव का धुसका खाने का बचपन से शौकीन थे। तभी तो #एतवार के दिन जब भी बाल कटवाने आते तो अलगे से उसका भी पैसा जोड़ के ले लेते थे। धुसका और उसके साथ मिलने वाला सब्जी का याद अभी भी आ जाये तो मुँह में पानी आ जाता है। अब घरे लहसुन प्याज़ तो बनता नहीं था तो इसलिए भी वहाँ का सब्जी थोड़ा ज्यादा अच्छा लगता था। तो चलिए आज धुसका बनाने का स्टोरी बताते हैं। बात पिछले साल का है जब हम #ज़ाम्बिया (अफ्रीका) में थे।

‌अब खाना बनाने का शौक तो बचपन से है, बस किचन मिलना चाहिए। अब वहाँ #चंदू_साव का होटल तो था नहीं जो सुबह-सुबह नाश्ता का उत्तम प्रबन्ध हो सके। मेस का खाना चूँकि अब सब #तमिलनाडु के लोग साथ में थे तो उन्हीं के स्टाइल का रहता था। अब 3-4 महीना एक ही जैसा खाकर रहना तो बहुत मुश्किल था। इसलिए हमलोग नाश्ता रूम में ही बना लेते थे। अब हमारे साथ में रहने वाले रात में ही चाउर, उरद दाल फूलने के लिए पानी में डाल देते और सुबह-सुबह उठ के मिक्सी में पीस देते। मेरा काम रहता था उठ के डोसा( छिलका) बनाने का।

अब रोज-रोज डोसा खाते- खाते जब मन भर गया तो सोचे काहे न धुसका बनाया जाए। तब अगला थोड़ा इंटरनेट और थोड़ा माताजी से पूछ ताछ कर के 3:2:1 के नाप से चावल, उरद दाल और चना दाल फूलने डाल दिये। सुबह थोड़ा मोटा ही पीसे खुद से की कहीं ज्यादा पतला हो जाये तो फिर गड़बड़ा न जाये और तेल गरम कर के छानना स्टार्ट किए। मोटा से अपने हिसाब से पतला कर के छान तो लिए पर सब का सब लाल हो गया छना के। अब खाने में तो मस्त लगा खर-खर पर कलर धुसका वाला नहीं आया। अब हमलोग का आदत तो पता ही है जब तक मन ना भरे तब तक संतोष नहीं होता है। फिर फोन लगा के माई से बतियाये तो जा के पता चला कि ज्यादा तेज आँच में छान दिये थे इहे के चलते गड़बड़ा गया था। फिर 2 दिन बाद बनाए इस बार कलर भी आया और टेस्ट भी । इसके बाद तो अब हर हफ्ता का आदत हो गया । जिस दिन डोसा का लिए चावल फुलाते उस दिन धुसका पक्का बनता। थोड़ा ज्यादा खस्ता खाने का मन करता तो चना दाल ज्यादा डाल देते और बाकी दिन वही पीसा चावल का #छिलका बनाते।

‌अभी तो यहाँ किचन का उतना अच्छा व्यवस्था नहीं है नहीं तो अमरीका में भी धुसका और आलू के सब्जी जरूर ही बनाते। पर घर जब भी आते हैं तब तब खाना नहीं भूलते है। अभी ही नगर भगवती के पूजा कर के आ रहे थे तो #लातेहार का #पलामू_स्वीट्स में धुसका खा के ही आए हैं। उसी का फोटो भी दिखा रहे हैं। आपलोग को केतना पसन्द है,और आपके आसपास सबसे बढ़िया धुसका कहाँ मिलता है जरूर बताइएगा।

©Anand Keshaw
23 Feb 2019, 03:47

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