Sunday, February 21, 2021

गोधन कुटाई/ भैयादूज





छोटहन से जउन परब हमरा सबसे निमन लागत हलक उ #गोधने बा। ई ला नई कि उ रोज हमर माई पूड़ी अऊ आलू के रसगर #तरकारी बनाव हलक, बल्कि इ ला कि उ दिन भिनसारे-भिनसारे दउरी लेके गाय के गोबर बटोरे, रेड़ी के पतई खोजे, हम निकल जाइत हली। ओकर बाद हमनी के असली मज़ा त सब रेंगन के साथे #रंगईनि के कांट खोजे में आव हलक।

रंगईनी के कांट के चक्कर में केतना #लट_लटिया हमर पैंट में चिपक जा हलक। सब के सब रेंगन दुसर के घरे से जादे आपन घर के बहिन - माई ला रंगईनी के कांट लान हली हम। बाद में हमनी के गोस्सो बड़ हलक, जब हमर माई बगलहारीन लोगन के हमर गाढ़ मेहनत कमाई दे देव हलक।

उ दिन जेकर घर में लकड़ी के बढ़िया #मूसर होइतक ओकर घर के बहरी गोधन कूटाए के तय्यारी होव हलक। माई-बहिन लोग बड़ा मन से गोबर से चरखाना बना के ओकरे भीतर जम्ह-जम्हिन, सांप, बीछ, कोठी, फूल, अउर न जाने का का बनावत हलन।

फिर सब बहिन, माई, ओला-टोला एक्के जगह जमा होके गोधन कुट हलन। तो बड़ी मन कर हलक कि का चलत बा तनि देखे-सुने मिल जईतक। लेकिन काहे ला अइसन हो परतक...? लईकन के नो एंट्री रहे ओन्ने। तबो हमन छुप के सुनती त सुनाई पड़तक कि " फलनवा भईया खेती करावे जात रहन। गोह काट देलत। मर गईलन। सिरा गईलन।जौरा भौरा के लादी गुदी ले के ऊपर.....।"

ओकर तनी देर बाद सभे कोई मिल के मूसल से गोधन कुटतन अऊर उ समय जो गीत गईतन।हमनी के बड़ा बढ़िया लगतक।आजो उ गीत के कुछ लाईन हमरा याद बा -
"चलले कवन भईया चकरिया
कवन बहिनी दिहली अशीष
हाथ गुलेल मुख पान
त जिय भईया लाख बरिस
भईया के हो बड़ी राज
त बहिनी लियावन चली।"

गोधन कुटाये घरी सबसे ज्यादे इंतज़ार रहतक गीत में आपन नाम गवाए के कि कब हमर नाम आइतक। आऊ जइसहीं अपन नाम सुनती लगतक अब तो #अजर_अमर हो गेली आउ गलती से कहीं अपन से पहीले छोट भाई के नाम लिया जईतक तो एकदम अंदर से अकबकी कि अब का होइ, फिर जब नाम लेतन तबे जान में जान आइतक।
जम भईया के घोड़वा रने- बने दौड़ल जाये ...
कांटे -कुसे अझुरायल ...
बन फल तोड़ी -तोड़ी खाये ...
#फलनवा भईया के घोड़वा ...
घर मुंहे दौड़ल जाये ..
पाने -फूले अझुरायल ...
नारियल फौरी -फौरी खाय.

आउ ओकरो से माजा जब पापा ईसब के नाम के बारी आइतक अब माई के साथे-साथे छोट चाची सब के भी नाम न लेवे ला रह हलक काहे कि भसुर के नाम ना न लेवल जला। गलती से कोई ले लेतक तो अंदर से घोर अपराध वाला मुँह बना देतन। आउ तुरन्त कौनो अपन ममेर फुफेर भाई के नाम लेके कह तन कि " अरे का होलई उहाँ वाली फुआ के बेटो के तो इहे नाम बा। "
जौरा कुटी ला भउरा....
कुटी ला जम के र रात ...
कुटी ला जम भईया के मुदई ..
छव महिना दिन रात ..
कुटी ला #चिलना भईया के मुदई छव महिना दिन रात ....

इ सब के बीच हमनियो बड़ी बदमाशी कर हली, दिवलिया वाला बचल पटखवा बीच-बीच में #भूडूम_भड़ाम
करत रह हली।

बाद में जब बहिन प्यार से बइठा के, चना, गुड़ आऊ चिनियाहा बर्फी खिया के रुइया के बनल अंगूठी पहनावा हलक ता आँख भर जा हलक कि "केतना हम एकरा दिन भर दौड़ावत रह ही, लेकिन आज हमरा खातिर ई आपन जिभिया में केतना कांटा घोंप लेलक।"

ओकरा बाद हमनी सब मिल के घर में बनल #दलपुड़ी अउर गुड़ के रसियाव खईती। वोइसे सच कहूँ त हमरा राखी परब से ज्यादा देशी, #पवितर अउर आपन भावना वाला गोधने परब लागला। आजो जहांँ भी हमर बहिन रह ला, हमरा ला जरूर गोधन कुट ला। हम त इहे कहब कि गोधन के दिन ओकर सराप, जीभ में रंगईनी कांट घोपे के बाद ओकरे अशीष के फल बा कि आज कुशल-मंगल से ही। आज त हम आपन बहिन के इहे संदेश देब कि "धीरे से कांटा #घोंपिहे बहिन, खाली ठेकैहे जीभिया पे।"

©Anand Keshaw
9 Nov 2018, 12:00

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