Sunday, February 21, 2021

नेतरहाट



नेतरहाट का मतलब होता है "#बाँस_का_बाजार"।पलामू संभाग के सबसे खूबसूरत जगह में #नेतरहाट का नाम सबसे ऊपर आता है।यह असीम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण शानदार पर्यटन स्थल है। इसे पलामू का कश्मीर भी कहा जाता है। #मैक्सलुस्कीगंज और नेतरहाट को पर्यटन का स्थल बनाने में अंग्रेजों की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि पलामू की गर्मी से परेशान हो कर उन्होंने ही इन पहाड़ियों को ढूंढा था और अपना आश्रय बनाया था।यहाँ पर मूलतः उरांव जाति के लोग बहुसंख्यक हैं। यहाँ की मुख्य बोली #संथाली और #कुडूख है।

नेतरहाट की पहाड़ियों से #सूर्योदय और #सूर्यास्त को देखना बहुत ही सुखद अनुभव होता है। दूर-दूर के लोग यहाँ पर पहाड़ों से डूबते और उगते सूरज को देखने के लिए खींचे चले आते हैं।उस समय जब आसमान में लालिमा फैलती है। तब यहाँ का नजारा कुछ और ही होता है।ऐसा लगता है जैसे कोई चित्रकार प्रकृति में रंग भर रहा हो। इसके अतिरिक्त #मैग्नोलिया_प्वाइंट, नासपाती बागान,शैले हाउस, पलामू बंगला आदि यहाँ के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं।क्षेत्रीय और बांग्ला फिल्मों के निर्माताओं का यह पसंदीदा जगह है।जो यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती से प्रभावित होकर अपने अधिकांश फिल्मों की शूटिंग यहीं करना पसंद करते हैं।

यहाँ छोटे-बड़े फॉल भी हैं।अपर #घाघरी फॉल्स और लोवर घाघरी फॉल। पहला वाला थोड़ा छोटा है परन्तु दूसरे की ऊंचाई 320 फिट है। जहाँ पत्थरों से गिरने वाली पानी की आवाज एवं जंगल से आने वाली चिड़ियों और झींगुरों की आवाज आपको प्रकृति के और करीब ले जाती है, आप किसी दूसरे ही दुनियाँ में पहुंच जाते हैं!यहाँ एक प्रसिद्ध स्कूल भी है नेतरहाट स्कूल। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात अविभाजित बिहार में गुरुकुल पद्धति पर गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा के लिए भारत के प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद जी के द्वारा इसका शुभारंभ किया गया था।जिसकी ख्याति सिर्फ पलामू में ही नहीं बल्कि पुरे भारत में फैली है।नेतरहाट में पर्यटक यहाँ जरुर जाते हैं और यहाँ पर तस्वीरें खिंचवाना बेहद पसंद करते हैं।यहाँ पर ठहरने के लिए रिसोर्ट और होटल भी हैं जहाँ रुककर आप यहाँ के अन्य खूबसूरत जगह में भी घुम सकते हैं।

मैग्नोलिया सनसेट पॉइंट पर आए बिना आपका नेतरहाट आना अधूरा है। इसके साथ एक प्रेम कहानी भी जुडी हुई है, जी हाँ। यहाँ पर एक प्रेमी युगल का जीवन सूर्यास्त हुआ था। एक अंग्रेज ऑफिसर की बेटी थी। जिसका नाम था मैग्नोलिया। उसे एक #चरवाहे से प्रेम हो जाता है। चरवाहा एक शानदार बांसुरी वादक था। वह भी मैग्नोलिया से बहुत प्यार करता था। उनकी प्रेम कहानी जब सामने आती है तो अंग्रेज ऑफिसर के द्वारा उस चरवाहे की हत्या कर दी जाती है। अपने प्रेमी से बिछुड़कर मैग्नोलिया टूट जाती है और इसी पॉइंट से वो अपने घोड़े से कूद कर अपनी जान दे देती है।कई किताबों में ये कहानी आपको मिल जाएगी।आज भी वहाँ इन प्रेमी जोड़ो के सम्मान में इनकी मूर्ति लगी हुई है।

अगर आप अभी तक नेतरहाट नहीं गए है तो नए साल में अपने परिवार के साथ यहाँ जरुर जाइये।आपको बहुत अच्छा लगेगा।अगर आप नेतरहाट घुमकर आ चुके हैं तो अपनी सुखद स्मृति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को अवश्य साझा करेंगे कि ठेठ पलामू के समस्त पाठक लाभान्वित हों।

©Sunny Shukla
6 Jan 2019, 10:31

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