ये शब्द और कार्य किसी भी कार्यक्रम के महत्वपूर्ण अंग है। अगर #अंग्या_बिजे नहीं हुआ तो समझिए आपके घर कोई खाने नहीं आने वाला, और कहीं खाली #अंग्या मांग के भूल गए तो भी नहीं। इसीलिए हमारे यहाँ कहावत भी है "अंग्या मांग के बिजे गोल"।
अपने घर में सबसे छोटा होने के वजह से यह पुण्य का काम मुझे ही सौंपा जाता है। अंग्या मांगना अर्थात आपके घर में कार्यक्रम हो रहा है और आप उसके लिए खाने की आमंत्रण देने की सुचना देना चाहते हैं, तो उसके लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है कि "आज हमर घरे के अंग्या बा" और बिजे करवाया जाता है, जब कार्यक्रम में खाना बन जाए और खिलाने का वक़्त आ जाए तो सभी के घरों में जा कर बिजे करवाया जाता है अर्थात खाना बन चूका है अब आप खाने आ जाएँ। अगर गलती से भी दोनों में से एक छूटा तो गांव घर के लोग और ख़ासकर #गोतिया को भयंकर बुरा लग सकता है और वो फिर नहीं आने वाले हैं। और हाँ #अंग्या_बिजे कराने के लिए हाथ में पानी से भरा #लोटा होना चाहिए जो गमछा या रुमाल से ढका होना चाहिये। वैसे हम सच बताए लोटवा भारी हो जाता है यही ला हम खाली रखते हैं अब ढँकने के बाद अंदर खाली है कि भरल केकरा देखाई पड़ता है। इसी बहाने हर घर घूम भी लेते हैं और भेंट मुलाक़ात भी हो जाती है। एक बात महत्वपूर्ण ये भी है की "सलोंगे अंग्या/बिजे बा" बोलना जरूरी है, #सलोंगे शब्द छूट गया या उन्हें सुनाई नहीं दिया तो परिवार का एक ही सदस्य आएगा। सलोंगे मने होता है सभी लोग का मतलब तब ही सपरिवार आपके घर भोजन पर सब आएंगे।
अब इस चलन की शुरुआत पर नजर डाला जाये तो चूंकि हमारी संस्कृति में आसपास गांव-घर के लोगों का हर सुख दुःख में शामिल होना जरूरी होता है। उसी प्रकार से जब आपके यहाँ कुछ भी आयोजन है तो उन्हें खिलाया-पिलाया भी जाता है। अब अंग्या देना मतलब दो बात हो गई, एक तो उन्हें पहले से ही इस बात की जानकारी देना कि आज आपका और आपके पूरे परिवार का भोजन हमारे घर बनेगा ताकि आप उसी के हिसाब से अपने घर भोजन बनायें और अन्न की बर्बादी न हो। साथ ही दूसरे शब्दों में कहे तो उनसे आज्ञा भी ली जाती है कि हमारे यहाँ आपका और आपके परिवार के लिये भोजन की व्यवस्था है। अतः आप हमें आज्ञा दे कि हम सबके लिए भोजन अपने घर बनवाये। इसीलिए तो कई बार जब बिना #अंग्या के अगर बिजे करवाने चले जायें तो झट से लोग कह देते हैं कि "हमनी के तो पते न हलक, अभिये तो घरे सब खाना खईली"। खैर #गोतिया लोग तो कभी-कभी मान भी जाये पर शादी वियाह में अगर गलती से छुट गया तब तो कितना बाराती बिना खाये ही रह जाते हैं। तो यह सिर्फ़ एक चलन या नियम ही नहीं बल्कि इसी बहाने दिया जाने वाला सम्मान है।
एक बार हम बिजे करवा रहे थे बोले "बिजइया बा " अब 2-4 वर्ड छूट गया सामने चाची थीं एक बोली "बिजइया त नहर देन गइल बा" अब बिजय उनके बेटे का नाम था और नाम के आगे या/वा लगाना तो हमारा प्यारा रिवाज है। ख़ैर इस कला पर विशेष बात होगी कभी।
तो आगे से अंग्या मांग के बिजे गोल मत करियेगा।
©Sunny Shukla
10 Oct 2018, 08:13
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